उत्तर प्रदेश : यूपी के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सोमवार को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर एक विवादित बयान दिया. एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे सिंह ने कहा कि “ओवैसी के पूर्वज हिंदू थे और उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि जनभावना टाइम्स इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं की है. यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गई है.
वंदेमातरम विवाद पर कांग्रेस को घेरा
बृजभूषण सिंह ने वंदेमातरम के विरोध को लेकर कांग्रेस पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवाद खड़े करती है. सिंह ने दावा किया कि स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई “वंदेमातरम” के आधार पर लड़ी गई और इस आंदोलन में सिर्फ हिंदू ही नहीं, बड़ी संख्या में मुसलमान भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि जिन्ना के अलावा किसी भी मुसलमान को वंदेमातरम से दिक्कत नहीं थी. सिंह के अनुसार, भारत में रहने वाले लगभग 80 प्रतिशत मुसलमान कन्वर्टेड हैं और उन्हें इस गीत से कोई समस्या नहीं है.
भारत में वंदेमातरम नहीं गाएंगे तो कहां गाएंगे?
वंदेमातरम को लेकर उठाए गए सवालों पर सिंह ने दो टूक जवाब दिया “वंदेमातरम भारत में नहीं गाया जाएगा तो क्या पाकिस्तान में गाया जाएगा?” उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले लोग जानबूझकर धार्मिक भावनाएं भड़काते हैं, जबकि यह गीत राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करता है.
कल्कि धाम के निर्माण पर प्रतिक्रिया दी
कल्कि धाम को लेकर भी पूर्व सांसद ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बताया कि वे स्वयं धाम का दौरा कर चुके हैं और यह बेहद भव्य रूप ले रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए शिलान्यास के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम इसके निर्माण कार्य को देख रहे हैं. सिंह ने कहा कि कलयुग के अंत में कल्कि भगवान के अवतार का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है और जो व्यक्ति इसे मानना चाहे, वह माने; जो न माने, उस पर कोई दबाव नहीं है. उनके अनुसार, कल्कि धाम का निर्माण धार्मिक आस्था का विषय है और इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए.
राजनीतिक माहौल में बढ़ी गर्मी
पूर्व सांसद के बयानों ने राज्य की राजनीति में नए सिरे से हलचल मचा दी है. जहां ओवैसी समर्थक इसे बेबुनियाद बताते हुए विरोध जता रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक इसे इतिहास का तथ्य बता रहे हैं. वंदेमातरम और धार्मिक स्थल जैसे मुद्दों पर बयानबाजी ने 2024–25 की राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है.
First Updated : Monday, 08 December 2025