Pawan Singh Election Announcement: भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और लोकप्रिय सिंगर पवन सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा न लेने का साफ संकेत दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से साफ किया कि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनका पार्टी के प्रति समर्पण बरकरार रहेगा. इस घोषणा ने उनके राजनीतिक करियर को लेकर चल रही अटकलों को विराम दिया है.
पवन सिंह की इस घोषणा से जहां उनके फैंस में आश्चर्य है वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस पर चर्चा जोरों पर है. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि उन्होंने चुनाव लड़ने के उद्देश्य से पार्टी ज्वाइन नहीं किया था और वे पार्टी के सच्चे सिपाही बने रहेंगे.
पवन सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मैं भोजपुरीया समाज से बताना चाहता हूं कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ज्वाइन नहीं किया था और ना ही मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना है. मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं और रहूंगा. इस बयान से यह साफ हो गया कि वे राजनीतिक मैदान में चुनावी भागीदारी से दूर रहना चाहते हैं हालांकि उनका राजनीतिक जुड़ाव जारी रहेगा.
पिछले महीने पवन सिंह की बीजेपी के शीर्ष नेताओं और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात ने उनके चुनाव लड़ने की अफवाहों को हवा दी थी. उसR समय से उनकी चुनावी चर्चे जोर पकड़ने लगे थे लेकिन अब उनका यह स्पष्ट जवाब सबको चौंका गया है.
पवन सिंह को 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के आसनसोल सीट से पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था. हालांकि उनके कुछ सांग वीडियो और में बंगाली महिलाओं के प्रति अभद्रता दिखाने के आरोपों के चलते पार्टी ने उन पर दबाव बनाकर चुनाव से पीछे हटाया था.
बीजेपी से टिकट न मिलने पर पवन सिंह ने बिहार की काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था. राजपूत जाति से आने वाले पवन सिंह को उच्च जाति के कई वर्गों का समर्थन मिला, जिससे कुशवाहा समर्थक नाराज हुए और राजग को नुकसान उठाना पड़ा. अंततः इस सीट पर भाकपा (माले) ने जीत दर्ज की थी जबकि उपेंद्र कुशवाहा तीसरे स्थान पर रहे.
पवन सिंह हाल ही में अपनी पत्नी ज्योति सिंह के साथ विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहे. पत्नी ने उन पर कई गंभीर आरोप लगाई हैं. जिसके बाद लखनऊ स्थित उनके आवास में हंगामा भी हुआ. इस मामले में पवन सिंह ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी थी. इसके बाद ज्योति सिंह ने जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर से भी मुलाकात की थी जो इस विवाद को और अधिक गंभीर बनाता है. First Updated : Saturday, 11 October 2025