JDU internal conflict: बिहार की राजनीति में इन दिनों एनडीए गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है, लेकिन अब खुद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पार्टी के अंदर ही असंतोष उभर कर सामने आ गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और भागलपुर से लोकसभा सांसद अजय कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर सांसद पद से इस्तीफा देने की अनुमति मांगी है.
सांसद अजय मंडल ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें टिकट वितरण की प्रक्रिया में कोई भी सलाह नहीं दी गई, जबकि वे क्षेत्र के स्थानीय सांसद हैं. उन्होंने लिखा, "मुख्यमंत्री जी, कृपया मुझे सांसद पद से इस्तीफा देने की अनुमति दें. जब मेरी कोई भूमिका नहीं रही, तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है."
मंडल ने अपने पत्र में लिखा है कि वे पिछले दो दशक से जेडीयू के लिए निष्ठा से काम कर रहे हैं और संगठन को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अहम रही है. लेकिन वर्तमान में टिकट बंटवारे को लेकर लिए जा रहे फैसलों में उनकी राय की अनदेखी की जा रही है. उन्होंने लिखा, "जिन लोगों ने कभी पार्टी के लिए काम नहीं किया, उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है."
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद जब विधानसभा उपचुनाव हुए थे, तो जेडीयू पूरे बिहार में सिर्फ उसी सीट पर जीत दर्ज कर पाई थी, जहां से वे सांसद हैं. यह पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और जनता के विश्वास का प्रमाण है. लेकिन आज वही क्षेत्रीय सांसद निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखे जा रहे हैं.
मंडल ने आरोप लगाया कि उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है. उन्होंने इसे अपमानजनक बताते हुए लिखा कि जब एक सांसद को अपनी बात कहने का मौका तक नहीं मिल रहा है, तो यह पार्टी के भीतर लोकतंत्र की स्थिति को दर्शाता है.
अजय मंडल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी भी तरह का विद्रोह करने का नहीं है, बल्कि वे पार्टी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने चेताया कि अगर इसी तरह बाहरी या निष्क्रिय लोगों को टिकट देने की परंपरा बनी रही तो पार्टी की नींव कमजोर हो जाएगी और इसका सीधा असर मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर पड़ेगा.
पत्र के अंत में उन्होंने आत्मसम्मान और संगठन के प्रति सच्ची निष्ठा का हवाला देते हुए सांसद पद छोड़ने की अनुमति मांगी है. उनका कहना है कि वे अपने आत्मसम्मान के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते और संगठन में यदि समर्पित कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जाएगी तो यह चिंताजनक स्थिति है.
First Updated : Tuesday, 14 October 2025