दलित युवक को अंतरजातीय विवाह करना पड़ा भारी, पत्नी के परिजनों ने पीट-पीट कर उतारा मौत के घाट
ग्वालियर के हरसी गांव में अंतरजातीय विवाह करने पर दलित युवक ओम प्रकाश बाथम को सामाजिक बहिष्कार और जुर्माने का सामना करना पड़ा. गांव छोड़ने के बाद जब वह 19 अगस्त को लौटा, तो उसकी पत्नी के परिजनों और अन्य लोगों ने उसे पीट-पीटकर मार डाला. पुलिस ने हत्या के आरोप में 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. यह घटना जातीय भेदभाव की गंभीर सच्चाई को उजागर करती है.

Inter-Caste Marriage Murder Gwalior : मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के हरसी गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसमें एक दलित युवक ओमप्रकाश बाथम की अंतरजातीय विवाह के कारण हत्या कर दी गई. यह घटना न केवल जातिवाद की गहरी जड़ों को दर्शाती है, बल्कि सामाजिक असहिष्णुता और पारिवारिक दबाव के खतरनाक परिणामों को भी उजागर करती है.
जनवरी में की थी अंतरजातीय विवाह
पिता, भाई ने लाठी-डंडों से उतारा मौत के घाट
दरअसल, 19 अगस्त को, ओमप्रकाश और शिवानी अपने पैतृक गांव हरसी लौटे. इस दौरान, शिवानी के पिता द्वारका प्रसाद झा, भाई राजू झा, उमा ओझा और संदीप शर्मा सहित अन्य रिश्तेदारों ने ओमप्रकाश पर लाठियों से हमला किया. हमले में शिवानी भी घायल हुईं. परिवार ने ओमप्रकाश को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के बावजूद वह बच नहीं सके.
शिवानी की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
शिवानी की शिकायत पर पहले मारपीट का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन ओमप्रकाश की मृत्यु के बाद इसे हत्या में बदल दिया गया. पुलिस ने द्वारका प्रसाद झा, राजू झा, उमा ओझा और संदीप शर्मा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है. मुख्य आरोपी द्वारका प्रसाद झा और अन्य आरोपी फरार हैं.
समाज में गहरी नफरत और असहमति
यह घटना जातिवाद, सामाजिक असहिष्णुता और पारिवारिक दबाव के खतरनाक परिणामों को दर्शाती है. अंतरजातीय विवाह के खिलाफ समाज में गहरी नफरत और असहमति है, जो इस प्रकार की हिंसा को जन्म देती है. बता दें कि कानूनी रूप से यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 302 हत्या और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत आता है.
हत्या ने कानूनी व्यवस्था पर उठाए सवाल
ओमप्रकाश बाथम की हत्या न केवल एक व्यक्ति की जान की हानि है, बल्कि यह समाज की मानसिकता और कानूनी व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है. इस प्रकार की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि समाज में जातिवाद और असहिष्णुता को समाप्त करने के लिए शिक्षा, जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है.


