Gujarat Bulldozer Action: गांधीनगर में साबरमती किनारे चला बुलडोजर, 700 से ज्यादा अतिक्रमण ढहाए, अवैध बस्ती किया जा रहा धवस्त

गुजरात के गांधीनगर में गुरुवार की सुबह से ही बुलडोजरों की गड़गड़ाहट गूंज रही है. सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच सरकारी जमीन पर बने 700 से ज्यादा मकानों और अन्य निर्माणों को ध्वस्त किया जा रहा है. यह कार्रवाई न सिर्फ बड़े पैमाने पर है बल्कि इलाके में एक नया बदलाव लाने का संकेत भी दे रही है.

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Gandhinagar Bulldozer Action: गुजरात के गांधीनगर में गुरुवार को अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़े बुलडोज़र अभियान को अंजाम दिया गया. साबरमती नदी के किनारे स्थित सरकारी ज़मीनों पर अवैध रूप से बनाए गए 700 से अधिक मकानों और ढांचों को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए मोर्चा संभाल लिया. विरोध इतना तीव्र था कि एक बुलडोजर मौके पर पलट गया.

प्रशासन का कहना है कि जीईबी, पेथापुर और चारेदी इलाकों में लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था, जिन्हें कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद नहीं हटाया गया. इस कारण गुरुवार सुबह से ही भारी सुरक्षा के बीच तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की गई.

तीन इलाकों में एक साथ शुरू हुई कार्रवाई

गांधीनगर जिला प्रशासन ने जानकारी दी कि जीईबी, पेथापुर और चारेदी क्षेत्रों में सरकारी ज़मीनों पर वर्षों से अतिक्रमण था. इन इलाकों में कई बार नोटिस जारी कर लोगों को हटने के लिए कहा गया, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा. इसके बाद प्रशासन ने एक साथ तीनों इलाकों में बुलडोजर चलाने का फैसला किया. कार्रवाई की शुरुआत सुबह होते ही भारी पुलिस बल और नगर निगम की टीम के साथ की गई. मौके पर दर्जनों बुलडोजर तैनात किए गए जो एक के बाद एक मकानों और अस्थायी ढांचों को गिराते गए.

विरोध में उमड़े लोग

पेथापुर क्षेत्र में जैसे ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई, स्थानीय लोग भारी संख्या में विरोध जताने के लिए एकत्र हो गए. पुलिस की उपस्थिति के बावजूद प्रदर्शनकारी उग्र हो गए, जिससे मौके पर तनाव का माहौल बन गया. इसी अफरा-तफरी के बीच एक बुलडोजर असंतुलित होकर पलट गया. गनीमत रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ. पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए लोगों को तितर-बितर किया और कार्रवाई को आगे बढ़ाया.

प्रशासन की सख्ती

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार और पूर्व सूचना के आधार पर की गई है. अतिक्रमण हटाने के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर की साफ-सफाई, नदी के किनारे की सुंदरता और भविष्य की विकास योजनाओं के लिए यह अतिक्रमण हटाना जरूरी था.

प्रशासन के मुताबिक जिन लोगों के मकान तोड़े गए हैं उन्हें पहले ही कई बार नोटिस जारी किया गया था. इसके बावजूद उन्होंने सरकारी ज़मीन नहीं खाली की, जिसके बाद मजबूरन यह कार्रवाई की गई. अधिकारियों का कहना है कि आगे भी इसी तरह के अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त रवैया अपनाया जाएगा. First Updated : Thursday, 18 September 2025