93 साल बाद इतिहास रचते हुए प्रयागराज से उड़ान, स्टीव जॉब्स की पत्नी से जुड़ी यह खास घटना!

प्रयागराज एयरपोर्ट ने महाकुंभ के बीच एक ऐतिहासिक घटना को अंजाम दिया है. 93 साल बाद, यहां से एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान ने आसमान में उड़ान भरी. इस उड़ान में स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स भी सवार थीं. जानें कैसे इस महत्वपूर्ण घटना से जुड़ा है प्रयागराज का पुराना विमानन इतिहास और महाकुंभ में उनकी उपस्थिति. क्या इसने शहर को एक नई पहचान दिलवाई पढ़िए पूरी कहानी!

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Flight from Prayagraj: प्रयागराज, जो अपनी धार्मिकता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, ने हाल ही में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया. यह शहर महाकुंभ के दौरान पूरी दुनिया के सामने अपनी महानता को फिर से साबित कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक और अहम ऐतिहासिक घटना हुई है, जिसने इसे और भी चर्चा में ला दिया. और यह घटना सीधे तौर पर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स से जुड़ी है.

93 साल बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय उड़ान!

प्रयागराज हवाई अड्डे से 93 साल बाद पहली बार एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान उड़ी है. यह घटना बेहद ऐतिहासिक है, क्योंकि आखिरी बार 1932 में प्रयागराज से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती थीं. और इस बार यह उड़ान भूटान के लिए भरी गई, जिसमें स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स भी सवार थीं.

प्रयागराज एयरपोर्ट का गौरवमयी इतिहास

प्रयागराज का विमानन इतिहास बहुत पुराना और समृद्ध है. 18 फरवरी 1911 को हेनरी पिकेट ने प्रयागराज के पोलो मैदान से पहली हवाई उड़ान भरी थी, जो नैनी तक गई थी. यह सफर केवल 6 मील का था, लेकिन इससे हवाई यातायात की शुरुआत हो गई. इसके बाद, 1924 में एक समर्पित हवाई क्षेत्र का निर्माण शुरू हुआ और 1931 में इलाहाबाद हवाई अड्डा स्थापित किया गया.

1932 में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत

प्रयागराज हवाई अड्डा उन पहले चार हवाई अड्डों में से एक था, जहां से 1932 तक लंदन के लिए सीधी उड़ानें संचालित होती थीं. और अब, 93 साल बाद, जब भूटान एयरवेज का विमान प्रयागराज हवाई अड्डे पर उतरा, तो यह शहर के लिए एक नई शुरुआत थी.

महाकुंभ और लॉरेन पॉवेल जॉब्स की यात्रा

हाल ही में महाकुंभ के दौरान स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स ने प्रयागराज का दौरा किया था. वे यहां शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव करने आई थीं. महाकुंभ के दौरान उनकी उपस्थिति ने पूरे शहर को अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिलवाया. इसके बाद, वे भूटान के लिए रवाना हो गईं, और उनके साथ ही एक और ऐतिहासिक उड़ान हुई, जो प्रयागराज से भूटान गई. प्रयागराज ने 93 साल बाद इतिहास रचते हुए एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को अपने हवाई अड्डे से रवाना किया. यह घटना न सिर्फ प्रयागराज के विमानन इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, बल्कि महाकुंभ के दौरान इस शहर की बढ़ती प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है. इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर हम सबको गर्व महसूस होना चाहिए, और यह हमें याद दिलाता है कि यह शहर हमेशा से ही अपनी महानता के लिए जाना जाता है. First Updated : Sunday, 26 January 2025