Bihar Politics: बिहार के अररिया जिले में जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र इस बार राजनीतिक रूप से गरम नजर आ रहा है. यहां इस बार तीन पूर्व मंत्रियों के बीच प्रतिद्वंद्विता देखने को मिल रही है, जिनमें से दो स्वर्गीय सांसद तस्लीमुद्दीन के बेटे हैं. इस तरह इस सीट पर पारिवारिक राजनीति और दल‑दल बदलने की राजनीति का मिश्रण स्पष्ट तौर पर दिख रहा है.
सबसे पहले बात करें सरफराज आलम की, ये तस्लीमुद्दीन के बड़े पुत्र हैं. उन्होंने 1996 में राजनीति में कदम रखा था और बाद में चार बार जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत चुके हैं. इसके अतिरिक्त 2018 में हुए उपचुनाव में उन्हें अररिया लोकसभा क्षेत्र का सांसद बनने का अवसर भी मिला था. उन्होंने शुरुआत में राजद के टिकट पर कार्य किया, बाद में जदयू में चले गए और अब फिर नए मैदान में हैं.
इसके विपरीत उनके छोटे भाई शाहनवाज आलम इस बार राजद प्रत्याशी हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एआईएमआईएम के टिकट पर अपने बड़े भाई से ही मुकाबला किया था और जीत हासिल की थी. इस चुनावी दंगल में हिसाब साफ है. भाई vs भाई vs एक बेहतर राजनीतिक स्थिति तलाशने वाला तीसरा चेहरा.
तीसरे पहलू में हैं मंजर आलम, जो जदयू के पुरखे सिपाही माने जाते रहे हैं. उन्होंने लंबे समय से जदयू की राजनीति में सक्रियता दिखायी है. 2000 के बाद 2005 में वे मंत्री बने थे और पिछले चुनावों में टिकट नहीं मिला था. इस बार जदयू ने भरोसा जताया है और उन्हें जोकीहाट से उम्मीदवार बनाया है.
इसी बीच AIMIM ने भी इस सीट को खाली नहीं छोड़ा. उन्होंने यहां अपने प्रत्याशी के रूप में मुर्शीद आलम को उतारा है, जो पलासी प्रखंड के मुखिया हैं और वर्तमान में मुखिया संघ के अध्यक्ष भी हैं. इस कदम से इस सीट पर राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है.
इस तरह, इस बार जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में तीन पूर्व मंत्री (दो दलीय बदलाव के बाद) और एक सक्रिय AIMIM उम्मीदवार के बीच प्रतिद्वंद्विता का माहौल बन गया है. इस सीट का समीकरण, परिवारवाद, पार्टी‑परिवर्तन और स्थानीय समीकरण का संगम है. चुनाव परिणाम तय करेंगे कि जनता इस त्रिकोणीय संघर्ष में किसे अपना भरोसा देती है. First Updated : Monday, 20 October 2025