कानपुर के ‘I Love Mohammad’ विवाद से बढ़ी आग, वाराणसी में संतों ने ‘I Love Mahadev’ से किया पलटवार

Varanasi: कानपुर में 'आई लव मोहम्मद' विवाद के जवाब में वाराणसी में हिंदू संतों ने जोश और उत्साह के साथ 'आई लव महादेव' अभियान की शुरुआत की. शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती के नेतृत्व में सैकड़ों संतों ने एकजुट होकर काशी की पावन धरती पर प्रदर्शन किया और 'महादेव सेना' गठन ने 'हर हर महादेव' के जयकार लगाया.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

Varanasi: कानपुर से शुरू हुआ विवाद जल्द ही सियासी रंग लेने के साथ-साथ धार्मिक मोड़ ले लिया है. I Love Mohammad नामक अभियान के खिलाफ वाराणसी के संतों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और अपनी शक्ति का प्रदर्शन I Love Mahadev नामक मुहिम के जरिए किया. गलियों, घाटों, मंदिरों व सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर चपका दिए गए और नारे बाजी की गई. इस विरोध आंदोलन का नेतृत्व काशी के शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती के हाथों में था. उन्होंने जनता से अपील की कि महादेव भक्तों को सेना के रूप में संगठित किया जाए और यदि आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन बलपूर्वक आगे बढ़ाया जाए.

 काशी की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन

वाराणसी के प्रमुख संतों ने हाथों में I Love Mahadev लिखी तख्तियां लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर से दशाश्वमेध घाट तक एक संयुक्त मार्च निकाला. इस दौरान शंखनाद और हर हर महादेव के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा. युवा, महिलाएं, साधु-संत सभी इसका हिस्सा बने.

शंकराचार्य ने कहा कि यह चुनी हुई सरकार के खिलाफ साजिश है. I Love Mohammad के नाम पर शक्ति दिखाने की कोशिश की जा रही है लेकिन हम 70 प्रतिशत बहुसंख्यक समाज को सड़क पर उतार देंगे ताकि 30 प्रतिशत की मांगों का जवाब दिया जा सके. यदि शांति की भाषा नहीं समझी गई तो महादेव की फौज उन्हें कुचल देगी.

पोस्टर युद्ध और महादेव सेना 

प्रदर्शन के साथ ही शहर के पार्कों, बाजारों और आवासीय इलाकों में I Love Mahadev के पोस्टर चस्पा किए गए. शंकराचार्य ने दावा किया कि इस आंदोलन की महादेव की सेना में करोड़ों लोग शामिल हैं और इनमें से कुछ को सैन्य स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त है.

एक संत ने कहा कि I Love Mohammad के नाम से जो उन्माद फैलाया जा रहा है, वह सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है. हमारा यह अभियान शांति का संदेश देता है लेकिन यदि आवश्यकता पड़ी तो हमारी सेना सदैव तत्पर है. प्रदर्शन के दौरान कोई हिंसा नहीं हुई लेकिन स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और सतर्कता बरती.

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