पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR) को लेकर केंद्र सरकार को चुनौती दी है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि बंगाल में SIR लागू नहीं होने दिया जाएगा. ममता बनर्जी ने कहा कि SIR की चर्चाओं से बंगाल को अलग रखा जा रहा है और अधिकारियों को बैठकों में धमकाया जा रहा है.
सीएम ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी चुनौती दी और कहा कि बंगाल में विभिन्न समुदायों के लोग रहते हैं, देखते हैं आप वोटरों को कैसे हटाते हैं. उन्होंने बिहार की तुलना करते हुए कहा कि वहां एनडीए की सरकार होने के कारण उन्हें यह संभव हो पाया, लेकिन बंगाल की सामुदायिक संरचना पूरी तरह अलग है.
ममता बनर्जी ने SIR को एक तरह का फ्रॉड करार दिया. उन्होंने कहा कि इसमें जनता शामिल नहीं होती, बल्कि कुछ अधिकारियों को बैठकों में बुलाकर धमकाया जाता है और राज्य सरकार को पूरी तरह बाहर रखा जाता है. पश्चिम बंगाल के सीईओ के खिलाफ भी कई शिकायतें हैं, जिनका खुलासा सही समय पर करूंगी.
सीएम ने चेताया कि SIR की आड़ में असली वोटरों के नाम हटाने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि असम सरकार बंगाल के वोटरों को सूचना कैसे भेज सकती है? SIR शुरू होने से पहले ही एक केंद्रीय मंत्री डेढ़ करोड़ वोटरों के नाम हटाने की घोषणा कैसे कर सकते हैं? हम चुनाव आयोग से निष्पक्षता की उम्मीद करते हैं.
ममता ने कहा कि लोकतंत्र का ताना-बाना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर बुनते हैं. संविधान और आम जनता ही लोकतंत्र के स्तंभ हैं. किसी को भी किसी नागरिक के वोट के अधिकार को छीनने का अधिकार नहीं है.
सीएम ने दिल्ली में केंद्रीय एजेंसियों और बीजेपी सरकार की निंदा करते हुए कहा कि दिल्ली में तो एक ‘मीर जाफर’ भी बैठा है. उन्हें लगता है कि वे सब कुछ नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन अगर वे इसी तरह चलते रहे, तो सच्चाई सामने आ जाएगी. पोल खुल जाएगा. अगर असली मतदाताओं को हटाया गया, तो बंगाल के लोग ऐसा जवाब देंगे जैसा कोई और राज्य नहीं दे सकता.
First Updated : Thursday, 09 October 2025