Mohd Mustafa Son Death Case : पंजाब के पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के बेटे अकील अख्तर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है. इस मामले में दो विरोधाभासी वीडियो सामने आए हैं, जिन्होंने जांच एजेंसियों को गहरे असमंजस में डाल दिया है. पहले वीडियो में अकील ने अपने ही परिवार-पिता मोहम्मद मुस्तफा, मां रजिया सुल्ताना, बहन और पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे. उसने आरोप लगाया था कि उसके पिता और पत्नी के बीच अवैध संबंध हैं और पूरा परिवार उसे फंसाने या जान से मारने की साजिश रच रहा है. इस वीडियो को कथित तौर पर उसकी "डाइंग डिक्लेरेशन" के रूप में देखा गया, जिसमें उसने अपनी जान को खतरे में बताया था.
दूसरे वीडियो ने खड़ा किया नया मोड़
हाल ही में सामने आए एक दूसरे वीडियो ने इस मामले में नया मोड़ ला दिया है. करीब 3 मिनट के इस वीडियो में अकील ने कहा कि उसने जो भी आरोप पहले लगाए थे, वे उसकी खराब मानसिक और शारीरिक स्थिति की वजह से थे. उसने स्पष्ट किया कि उसका परिवार उसकी अच्छी देखभाल कर रहा था और किसी तरह की कोई साजिश नहीं हो रही थी. अपनी बहन की तारीफ करते हुए अकील ने यह भी कहा कि वह उसका खास ख्याल रखती है. इस वीडियो ने पहले दिए गए बयान की सत्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
FIR दर्ज, पुलिस ने SIT का किया गठन
पंचकूला पुलिस ने अकील की मौत के मामले में पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा, उनकी पत्नी और पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना, बेटी और बहू सहित चार लोगों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया है, जो सभी वीडियो, बयानों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी.
16 अक्टूबर को हुई थी घटना की शुरुआत
डीसीपी सृष्टि गुप्ता के अनुसार, यह घटना 16 अक्टूबर को हुई थी. अकील की मौत की सूचना उसके परिवार ने स्वयं पुलिस को दी थी और उस समय किसी भी तरह की साजिश या आशंका का उल्लेख नहीं किया गया था. पोस्टमार्टम के बाद शव को परिवार को सौंप दिया गया था. हालांकि, बाद में एक तीसरे पक्ष द्वारा दी गई शिकायत में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अकील के वीडियो का हवाला देकर मामला फिर से उठाया गया.
कौन-सा वीडियो सच? पुलिस की अग्निपरीक्षा
अब ये दोनों वीडियो ही इस केस के मुख्य साक्ष्य बन गए हैं. पहला वीडियो जहां परिवार के खिलाफ गवाही जैसा प्रतीत होता है, वहीं दूसरा वीडियो परिवार को निर्दोष बताता है. पुलिस के लिए अब यह पता लगाना सबसे अहम है कि कौन-सा वीडियो कब और किन हालात में बनाया गया, और कौन-सी बात सही है. इस घटना ने न सिर्फ पंजाब की राजनीति और पुलिस प्रशासन को झकझोरा है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा किया है कि आत्महत्या या मौत से पहले की गई रिकॉर्डिंग किस हद तक कानूनी तौर पर मान्य हो सकती है.
First Updated : Tuesday, 21 October 2025