पंजाब की धरती हमेशा मेहनतकश किसानों की पहचान रही है, लेकिन धान की कटाई के बाद पराली जलाने की परंपरा ने वर्षों से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है. अब इस परंपरा को बदलने की दिशा में मोगा जिले ने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है. यहां के डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गांधी ने खुद ट्रैक्टर पर सवार होकर किसानों संग खेतों में पहुंचकर पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों का प्रदर्शन किया. यह दृश्य सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि किसानों के प्रति अपनापन और जिम्मेदारी का प्रतीक था.
अधिकारियों ने किसानों को यह संदेश दिया कि पराली जलाना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक बदलने योग्य आदत है. उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया. डीसी सेतिया ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य हर किसान तक ऐसी मशीनें पहुंचाना है जिससे पराली जलाने की नौबत न आए. उन्होंने बताया कि जिले में पहले से मौजूद 4,800 मशीनों के अलावा इस वर्ष 320 नई आधुनिक कृषि मशीनें सब्सिडी पर दी गई हैं. साथ ही, 40 गांवों में 62 एकड़ भूमि पर पराली भंडारण स्थल भी तैयार किए गए हैं.
एसएसपी अजय गांधी ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए 27 क्लस्टर अधिकारी और 152 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं. पुलिस और नागरिक प्रशासन मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी किसान को उपकरणों की कमी या जानकारी के अभाव में पराली न जलानी पड़े.
यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि जनसुरक्षा की दिशा में भी अहम कदम है. हर साल पराली से उठने वाला धुआं सड़कों पर घना कोहरा फैलाकर हजारों हादसों का कारण बनता है. मोगा प्रशासन की यह पहल इन घटनाओं में कमी लाने के साथ-साथ हवा को स्वच्छ रखने में भी मददगार साबित होगी.
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने यह साबित किया है कि शासन केवल आदेश देना नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उनके साथ समाधान ढूंढना है. पराली प्रबंधन, फसल विविधीकरण और मशीनरी सब्सिडी जैसी योजनाओं से किसानों का विश्वास बढ़ा है.
मोगा की यह पहल नई सोच, नया पंजाब की ओर कदम है, जहां खेतों में धुआं नहीं, हरियाली होगी. सड़कें सुरक्षित होंगी और सरकार व किसान मिलकर पर्यावरण की रक्षा करेंगे. First Updated : Tuesday, 04 November 2025