Punjab DIG Bribery Case : पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और रोपड़ रेंज के डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिश्वतखोरी के एक मामले में रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है. सूत्रों के अनुसार, चंडीगढ़ स्थित उनके कार्यालय में छापेमारी के बाद CBI की टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया. यह कार्रवाई मंडी गोबिंदगढ़ के एक स्क्रैप व्यापारी से संबंधित रिश्वत के मामले में की गई है. खबरों के मुताबिक, DIG भुल्लर पर हर महीने पांच लाख रुपए रिश्वत लेने का आरोप है, जिसकी शिकायत CBI को मिली थी. मामले में गुप्त जांच के बाद जाल बिछाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया.
ईमानदार छवि और कठोर कार्रवाई के लिए थे प्रसिद्ध
हालांकि, DIG हरचरण सिंह भुल्लर को पंजाब पुलिस में एक सख्त और ईमानदार अफसर के तौर पर जाना जाता था. वे संगठित अपराध, सामाजिक सुरक्षा और खासकर ड्रग माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए चर्चा में रहे हैं. ‘ड्रग्स के विरुद्ध युद्ध’ अभियान के अंतर्गत उन्होंने 288 एफआईआर दर्ज कर 452 नशा तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाया. इसके साथ ही उन्होंने नशे की पूरी सप्लाई चेन को खत्म करने के लिए रणनीतिक कार्रवाई की. इसलिए उनकी गिरफ्तारी ने न सिर्फ विभाग में, बल्कि आम जनमानस में भी गहरी हैरानी पैदा की है.
भ्रष्टाचार के आरोपों से धूमिल हुई छवि
जहां एक ओर DIG भुल्लर की छवि एक सख्त प्रशासक की थी, वहीं अब उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप ने उनकी पूरी छवि को गहरा आघात पहुंचाया है. CBI ने स्पष्ट किया है कि शिकायत के बाद गंभीरता से जांच की गई और जब प्राथमिक साक्ष्य सामने आए, तब गिरफ्तारी की गई. जल्द ही इस मामले में विशेष अदालत में पेशी की संभावना है और CBI प्रेस नोट जारी कर सकती है.
हरियाणा-पंजाब में अधिकारियों पर सवाल
दरअसल, यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हरियाणा और पंजाब में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी सुर्खियों में हैं. किसी पर आत्महत्या के पीछे भ्रष्टाचार का दबाव बताया जा रहा है, तो कोई अधिकारी रिश्वत लेते पकड़ा जा रहा है. यह स्थिति राज्य के प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, जहां ईमानदारी और जवाबदेही की मिसाल माने जाने वाले अफसरों पर भी अब संदेह जताया जा रहा है.
पुलिस की साख पर असर
DIG हरचरण सिंह भुल्लर की गिरफ्तारी सिर्फ एक अफसर का मामला नहीं, बल्कि पुलिस की पूरी साख से जुड़ा हुआ विषय है. जिस अफसर को जनता ईमानदारी की मिसाल मानती थी, जब उस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगे, तो आम नागरिकों का विश्वास तंत्र से डगमगाने लगता है. यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सिर्फ भाषणों तक सीमित न होकर, वास्तविक आचरण में झलकनी चाहिए.
First Updated : Thursday, 16 October 2025