RJD परिवार में बड़ा बवाल: बहस, आरोप और चप्पल—क्या है रोहिणी–तेजस्वी विवाद की असल वजह?

लालू प्रसाद यादव के परिवार में तनातनी खुले रूप में सामने आ चुकी है. रोहिणी ने आरोप लगाया कि उनके साथ घर में बेहद अपमानजनक व्यवहार किया गया और उन्हें उस माहौल से दूर जाना पड़ा. 

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

लालू प्रसाद यादव के परिवार में जारी तनातनी अब खुले रूप में सामने आ चुकी है. बीते दिन अपनी भावनात्मक पोस्ट से चर्चा में आईं उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने एक और संदेश साझा किया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी. रोहिणी ने आरोप लगाया कि उनके साथ घर में बेहद अपमानजनक व्यवहार किया गया और उन्हें उस माहौल से दूर जाना पड़ा. 

रोहिणी आचार्य ने क्या कहा?

अपने दर्द को व्यक्त करते हुए रोहिणी ने लिखा कि एक बेटी, बहन और मां के रूप में उन्होंने सम्मान से समझौता नहीं किया और इसी कारण उन्हें बेहद कटु परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि मजबूरी में रोते हुए माता-पिता और बहनों को छोड़कर लौटना पड़ा, जिससे वह भीतर तक टूट गईं.

बहस कैसे शुरू हुई?

परिवार के करीबी सूत्रों का दावा है कि घटना की शुरुआत कल दोपहर हुई, जब रोहिणी और उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. रोहिणी ने चुनाव हार की समीक्षा और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की बात उठाई. उन्होंने यह मुद्दा भी सामने रखा कि संजय यादव को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है, जिसका जवाब देना आवश्यक है.

बताया जाता है कि इस बात पर तेजस्वी भड़क गए और उन्होंने आरोप लगाया कि हार के लिए रोहिणी ही जिम्मेदार हैं. विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में तेजस्वी ने अपनी बड़ी बहन पर चप्पल तक उठा दी और अपमानजनक शब्द कहे. जबकि कुछ समय पहले यही तेजस्वी, नाराज़ होकर सिंगापुर लौट चुकी रोहिणी को राघोपुर में प्रचार के लिए खुद लेकर आए थे.

चुनाव प्रचार को लेकर नाराज़गी

रोहिणी ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को केवल राघोपुर तक सीमित किए जाने पर भी असहजता जताई थी. वह चाहती थीं कि अपने क्षेत्र सारण की सभी विधानसभा सीटों पर प्रचार कर सकें, लेकिन उन्हें केवल एक क्षेत्र में ही सीमित कर दिया गया. इससे पहले जुलाई 2023 में तेजस्वी ने उन्हें सारण से लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था. रोहिणी ने तब कहा था कि वह पिता लालू के निर्देश पर ही कोई निर्णय लेंगी. बाद में पाटलिपुत्र से लड़ने की उनकी इच्छा भी मीसा भारती के असहमत होने के कारण पूरी नहीं हो सकी और अंततः वे सारण से उम्मीदवार बनीं.

मतभेद कब गहराए?

सूत्रों के अनुसार, डेढ़ साल पहले से ही संजय यादव द्वारा रोहिणी को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी जाने लगी थी. यह कहा जा रहा था कि रोहिणी का बढ़ता दखल तेजस्वी के राजनीतिक भविष्य के लिए खतरा बन सकता है. कई मौकों पर रोहिणी को हतोत्साहित और अपमानित किया गया. यहां तक कि सारण से उनकी हार सुनिश्चित करने की कोशिशें भी की गईं, जिनमें परिवार से जुड़े एक एमएलसी की भूमिका का भी जिक्र है. रोहिणी की नाराज़गी इस बात से भी बढ़ी कि विधानसभा चुनाव में उन्हीं दो विधायकों को फिर टिकट दिया गया, जिन्होंने लोकसभा चुनाव में उनका साथ नहीं दिया था.

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