महाराष्ट्र : मुंबई के 26 नवंबर 2008 के आतंकवादी हमले के हीरो सदानंद दाते को महाराष्ट्र का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया गया है. पूर्व एनआईए प्रमुख दाते की बहादुरी और साहस की कहानी उस रात से जुड़ी हुई है, जब मुंबई शहर आतंकियों के हमले की चपेट में था.
आतंकियों का सामना करते हुए थे घायल
आपको बता दें कि उस रात दाते सेंट्रल रीजन के एडिशनल कमिश्नर थे. जैसे ही हमले की खबर मिली, उन्होंने मलाबार हिल से अपने घर से निकलकर सीएसटी की ओर कदम बढ़ाया. रास्ते में उन्होंने एक थाने से कार्बाइन ली और छह सिपाहियों को साथ लिया. जब वे सीएसटी पहुंचे, तो पता चला कि दो आतंकवादी, जिन्हें बाद में अजमल कसाब और अबू इस्माईल के नाम से जाना गया, कामा एंड अलब्लैस अस्पताल में घुस गए हैं.
अस्पताल में बहादुरी की मिसाल
दाते ने बिना समय गवाए अस्पताल में प्रवेश किया. छत से आतंकियों की फायरिंग हो रही थी. जैसे ही दाते अंदर बढ़े, कसाब ने उनके पास हैंड ग्रेनेड फेंका. इस विस्फोट में सब इंस्पेक्टर प्रकाश मोरे शहीद हो गए और दाते समेत तीन सिपाही जख्मी हो गए. बावजूद इसके, दाते पीछे नहीं हटे और घायल होने के बावजूद मोर्चा संभाले रखा. उन्होंने तीनों जख्मी सिपाहियों को इलाज के लिए भेजा और खुद छत तक जाकर आतंकियों को करीब 40 मिनट तक रोके रखा.
राष्ट्रपति पदक से सम्मानित बहादुर अफसर
इस अद्भुत साहस के लिए दाते को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया. 1990 बैच के आईपीएस अफसर दाते का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल है. गरीब परिवार में जन्मे दाते ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और ईमानदारी से सिस्टम में अपनी पहचान बनाई. उन्हें जांबाज, कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार अफसर के रूप में जाना जाता है.
अहम पदों पर रहे दाते
इसके साथ ही मुंबई पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवा देने के बाद, दाते ने सीबीआई और एटीएस में भी काम किया. उन्होंने मीरा-भायंदर-वसई-विरार के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में भी सेवाएं दीं. बाद में उन्हें एनआईए प्रमुख बनाया गया. उनके कार्यकाल में मुंबई हमले के बड़े आरोपी तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाया गया.
First Updated : Saturday, 03 January 2026