गाजियाबाद में 8 साल तक एक किराए के दो-मंजिला मकान को फर्जी दूतावास बनाकर बैठने वाला हर्षवर्धन जैन आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है. उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में सामने आया है कि हर्षवर्धन जैन ना सिर्फ एक फर्जी दूतावास चला रहा था, बल्कि ₹300 करोड़ के हवाला और नौकरी घोटाले में भी शामिल था. जांच में ये भी सामने आया है कि उसने 10 साल में 162 बार विदेश यात्राएं कीं और उसके कई विदेशी बैंक खातों का भी पता चला है.
गाजियाबाद में हुई छापेमारी में STF को चार फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट वाली लग्जरी कारें, फर्जी दस्तावेज और महंगी घड़ियों का संग्रह भी मिला है. हर्षवर्धन जैन को अब कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है.
गाजियाबाद के पॉश इलाके में बने इस दो-मंजिला मकान के बाहर एक नेमप्लेट लगी थी- Grand Duchy of Westarctica और H E HV Jain Honorary Consul. मकान के बाहर भारत और वेस्टआर्टिका के झंडे लहराते रहते थे. वेस्टआर्टिका, अंटार्कटिका में स्थित एक माइक्रोनेशन है जिसे कोई भी मान्यता प्राप्त देश आधिकारिक तौर पर नहीं मानता. जांच के अनुसार, हर्षवर्धन जैन इस नकली पहचान के सहारे लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने का लालच देता था और इस ‘दूतावास’ की आड़ में नेटवर्किंग करता था. साल 2017 से वो ये फर्जीवाड़ा चला रहा था और सिर्फ 6 महीने पहले ही इस मकान को किराए पर लिया था.
छापेमारी के दौरान, पुलिस को हर्षवर्धन जैन की विवादित तथाकथित ‘गॉडमैन’ चंद्रास्वामी और सऊदी हथियार डीलर अदनान खशोगी के साथ तस्वीरें मिलीं. चंद्रास्वामी 80 और 90 के दशक में प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव, चंद्रशेखर और वीपी सिंह के आध्यात्मिक सलाहकार माने जाते थे. वे खुद वित्तीय घोटालों में फंसे थे और 1996 में गिरफ्तार भी किए गए थे. STF के अनुसार, चंद्रास्वामी ने ही हर्षवर्धन जैन की मुलाकात अदनान खशोगी और ठग अहसान अली सय्यद से करवाई थी. जैन और सय्यद ने मिलकर करीब 25 शेल कंपनियां बनाई थीं, जिनके जरिए भारी मात्रा में काले धन को सफेद किया गया.
अहसान अली सय्यद, जो अब तुर्की का नागरिक बन चुका है, उसने स्विट्ज़रलैंड में एक कंपनी- Western Advisory Group की स्थापना की थी. ये कंपनी बिजनेस फर्मों को ऋण दिलाने के नाम पर ब्रोकर की भूमिका निभाती थी. इसी के जरिए लगभग ₹300 करोड़ की ठगी की गई. 2022 में सय्यद को लंदन में गिरफ्तार किया गया.
अब पुलिस ये जांच कर रही है कि इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले में हर्षवर्धन जैन की भूमिका कितनी बड़ी थी. जैन ने अपने नकली दूतावास और 'डिप्लोमैटिक' कवर के जरिए लोगों को गुमराह कर ठगने का तंत्र खड़ा कर रखा था. हर्षवर्धन जैन की गिरफ्तारी के बाद वेस्टआर्टिका ने खुद को उससे पूरी तरह अलग कर लिया है. वेस्टआर्टिका ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 2016 में जैन ने हमारे मिशन के लिए एक बड़ा दान दिया था, जिसके बाद उन्हें ‘Honorary Consul to India’ बनाया गया. लेकिन उन्हें कभी भी ‘अम्बेसडर’ का दर्जा या अधिकार नहीं दिया गया. इस बयान में आगे कहा गया है कि हर्षवर्धन जैन को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया है और उनकी गतिविधियों की जांच की जा रही है.
First Updated : Sunday, 27 July 2025