बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ता जा रहा है. इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राज्य में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. राजद सांसद मनोज झा ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के इस कदम को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है. राजद का आरोप है कि यह कवायद एकतरफा और केवल बिहार को निशाना बनाकर की जा रही है.
उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने 24 जून को बिहार में एसआईआर के आदेश जारी किए थे, जिसका उद्देश्य 25 जुलाई तक लगभग आठ करोड़ मतदाताओं की समीक्षा करना है. आयोग का कहना है कि यह अभ्यास बिना किसी बदलाव के “ज़मीनी स्तर पर सुचारू रूप से” किया जा रहा है. लेकिन विपक्षी दल इसे संदेह की नजर से देख रहे हैं.
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया है कि जब 2003 में यह नियम पूरे देश में लागू किया गया था, तो अब केवल बिहार को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने इसे एकतरफा कार्रवाई करार दिया. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस प्रक्रिया की आलोचना करते हुए इसे “दलितों और वंचितों के मताधिकार को छीनने की साजिश” बताया.
दस्तावेज बाद में जमा करने की छूट
बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह चुनाव आयोग के निर्देशानुसार हो रही है. उन्होंने बताया कि 1 अगस्त को जारी की जाने वाली मसौदा मतदाता सूची में उन सभी मौजूदा मतदाताओं के नाम शामिल होंगे जिन्होंने गणना फॉर्म जमा किया है. दस्तावेज़ न होने की स्थिति में भी मतदाताओं को फॉर्म के साथ दस्तावेज बाद में जमा करने की छूट दी गई है.
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के बाद अब चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल को निशाना बना सकता है. मोइत्रा ने कहा कि यह प्रक्रिया युवाओं को वोटिंग अधिकार से वंचित करने की साजिश है. First Updated : Sunday, 06 July 2025