नई दिल्ली: पिछले कुछ वर्षों से दुनिया भर के कामकाजी वर्ग के बीच सबसे बड़ा खौफ यह रहा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानों की नौकरियां पूरी तरह निगल जाएगा? चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद से ही इस वैश्विक बहस ने और तूल पकड़ लिया था और कई कंपनियों ने लागत कम करने के नाम पर बड़े पैमाने पर छंटनी भी की.
एआई इंसानों को रिप्लेस नहीं कर सकता
लेकिन अब तकनीक की दुनिया को संचालित करने वाले दिग्गज टेक सिंडिकेट्स और शीर्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के सुर पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं. गूगल, एनवीडिया और खुद चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के प्रमुखों ने अब वैश्विक मंचों पर यह दावा किया है कि एआई से जॉब्स खत्म होने का डर पूरी तरह बेवजह है. उनका मानना है कि एआई इंसानों को रिप्लेस करने के लिए नहीं बल्कि उनके काम को और बेहतर बनाने के लिए एक सहायक टूल के रूप में विकसित हो रहा है.
एआई से जॉब्स खत्म होने का डर पूरी तरह बेवजह
एआई क्रांति के केंद्र में रहे ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में एक परिचर्चा के दौरान सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि नौकरियों के खत्म होने को लेकर उनका शुरुआती आकलन पूरी तरह गलत था. ऑल्टमैन ने कहा, शुरुआत में मुझे और मेरी टीम को लगता था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे पहले एंट्री-लेवल ऑफिस जॉब्स और क्लैरिकल कार्यों को पूरी तरह से और बहुत तेजी से खत्म कर देगा. लेकिन जमीनी हकीकत पर ऐसा बड़े स्तर पर बिल्कुल नहीं देखा गया है. मैं इस मोर्चे पर गलत साबित हुआ हूं और मुझे गलत साबित होने की बेहद खुशी है.
ऑल्टमैन ने क्या कहा
ऑल्टमैन ने इसके पीछे मानवीय संवेदनाओं और वास्तविक जुड़ाव का तर्क दिया. उन्होंने उदाहरण देते हुए साझा किया कि कुछ समय के लिए उन्होंने अपने निजी संदेशों, ईमेल और बैठकों के जवाब पूरी तरह एआई टूल्स से लिखवाने का प्रयोग किया था. लेकिन जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि इंसानों के बीच की बातचीत, भावनाओं के आदान-प्रदान और आपसी जुड़ाव का जो मूल्य होता है. उसे मशीनें कभी कॉपी नहीं कर सकतीं.
AI को नए टूल की तरह अपनाएं
गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई भी लगातार इसी रुख का समर्थन कर रहे हैं. पिचाई का मानना है कि आने वाली नई पीढ़ी को एआई को एक दुश्मन या डर के रूप में नहीं बल्कि एक नए सहयोगी टूल की तरह देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि आने वाली नस्लें एआई के साथ काम करेंगी और इसी तकनीक के सहारे अपना भविष्य निर्मित करेंगी.
नए रोजगार पैदा होंगे
पिचाई के अनुसार इतिहास गवाह है कि जब भी कोई नई तकनीक आती है तो शुरुआती दौर में पुराना काम कम होता है. लेकिन उसके समानांतर कई गुना ज्यादा नए रोजगार पैदा होते हैं. वर्तमान में भी एआई ट्रेनिंग, एआई मॉनिटरिंग, डेटा क्यूरेशन और एआई-आधारित कंटेंट इवैल्यूएशन जैसे बिल्कुल नए सेक्टर्स में नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ी है.
कंपनियों के लिए छंटनी का आसान बहाना
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को रफ्तार देने वाले चिपमेकर दिग्गज कंपनी Nvidia के सीईओ जेनसन हुआंग का बयान भी कॉर्पोरेट जगत में काफी सुर्खियां बटोर रहा है. हुआंग ने उन कंपनियों और मैनेजमेंट पर तीखा सवाल उठाया है जो अपनी हर छंटनी और मिसमैनेजमेंट का ठीकरा एआई के सिर पर फोड़ रही हैं.
जेनसन हुआंग ने क्या कहा
जेनसन हुआंग ने कहा, कई कंपनियां अपनी अंदरूनी कमियों को छिपाने के लिए एआई का नाम लेकर एक आसान बहाना बना रही हैं. एआई तकनीक अभी इतनी पुरानी नहीं हुई है कि वह रातों-रात पूरी दुनिया की व्यवस्था बदलकर नौकरियां खत्म कर दे.
खतरा एआई से नहीं बल्कि खुद इंसान है
हुआंग के मुताबिक खतरा एआई से नहीं बल्कि खुद को न बदलने से है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में एआई किसी की नौकरी पूरी तरह खत्म नहीं करेगा. लेकिन काम करने का पारंपरिक तरीका जरूर बदल देगा. जो पेशेवर समय रहते एआई टूल्स को सीख लेंगे और उसके साथ तालमेल बिठाकर काम करना शुरू करेंगे वही करियर में आगे बढ़ेंगे. जो लोग इस नई तकनीक को अपनाने से कतराएंगे उनके करियर पर जरूर संकट आ सकता है. First Updated : Wednesday, 27 May 2026