बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर मेटा की नजर, इंस्टाग्राम-फेसबुक के लिए लॉन्च किए नए टूल्स

टेक कंपनी मेटा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक के लिए अपने 'पैरेंटल सुपरविजन टूल्स' को पहले से कहीं ज्यादा एडवांस बना दिया है. इन नए फीचर्स के जरिए अब माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नियंत्रण रख सकेंगे.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में कम उम्र में ही बच्चों के हाथों में स्मार्टफोन आ जाना बेहद आम बात हो गई है. लेकिन इसके साथ ही माता-पिता की यह चिंता भी बढ़ गई है कि उनके बच्चे सोशल मीडिया पर क्या देख रहे हैं. उनकी फीड में किस तरह का कंटेंट आ रहा है और वे किन लोगों से बातचीत कर रहे हैं.

बनाया गया ज्यादा एडवांस

अभिभावकों की इसी बड़ी परेशानी को दूर करने के लिए दिग्गज टेक कंपनी मेटा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक के लिए अपने 'पैरेंटल सुपरविजन टूल्स' को पहले से कहीं ज्यादा एडवांस बना दिया है. इन नए फीचर्स के जरिए अब माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नियंत्रण रख सकेंगे.

स्क्रीन टाइम के साथ दिखेगा कंटेंट का पैटर्न

मेटा के इस नए अपडेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब माता-पिता केवल यह नहीं देखेंगे कि बच्चा कितनी देर फोन चला रहा है. वे उनके कंटेंट पैटर्न को भी ट्रैक कर पाएंगे. नए 'इंटरेस्ट इनसाइट्स' टूल की मदद से पेरेंट्स यह देख सकेंगे कि उनके बच्चे की फीड में किस तरह की रील्स, वीडियो या पोस्ट बार-बार दिखाई दे रही हैं. इसके अलावा बच्चे इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम में किन विषयों को जोड़ रहे हैं, इसकी जानकारी भी माता-पिता को मिल जाएगी.

 पल-पल की डिटेल

लिए दिग्गज टेक कंपनी मेटा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक के लिए अपने 'पैरेंटल सुपरविजन टूल्स' को पहले से कहीं ज्यादा एडवांस बना दिया है. अब इस सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड के जरिए माता-पिता को रीयल-टाइम जानकारी मिलेगी कि उनके बच्चे ने हाल ही में किन नए लोगों को फॉलो किया है या किस अनजान यूजर ने उन्हें फॉलो करना शुरू किया है.

नजर रखना बेहद आसान

इससे संदिग्ध या अनजान लोगों से बढ़ते संपर्क पर नजर रखना बेहद आसान हो जाएगा और बच्चे ऑनलाइन फ्रॉड या साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं से सुरक्षित रह सकेंगे.

रात में थम जाएगी नोटिफिकेशन की रफ्तार

बच्चों की मानसिक सेहत और नींद पर सोशल मीडिया के बुरे असर को रोकने के लिए मेटा ने एक खास टाइम-लिमिट फीचर भी जोड़ा है. इसके तहत रात के समय एक निश्चित अवधि के बाद ऐप की तरफ से आने वाले नोटिफिकेशन्स खुद साइलेंट हो जाएंगे. इसका उद्देश्य देर रात तक स्क्रीन देखने की बच्चों की आदत पर लगाम लगाना है ताकि वे सोशल मीडिया की लत से बच सकें.

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