नई दिल्ली: आजकल नई कारें बड़े-बड़े टचस्क्रीन और हाई-टेक फीचर्स से लैस होकर बाजार में आ रही हैं. ये टेक्नोलॉजी देखने में आधुनिक और आकर्षक लगती है, लेकिन क्या यह ड्राइविंग के दौरान हमारी सुरक्षा के लिए जोखिम नहीं बन रही? कई रिसर्च और विशेषज्ञों के अनुसार, टचस्क्रीन जितनी सुविधाजनक है, उतना ही यह ड्राइवर का ध्यान भटका सकती है, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ सकती है.
कार निर्माता इसे मॉडर्न और प्रीमियम एक्सपीरियंस बताकर मार्केट करते हैं, लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस फीचर को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं होती. सवाल यह है कि क्या हम स्मार्ट कारों के चक्कर में अपनी सुरक्षा को जोखिम में डाल रहे हैं?
स्वीडन की एक मशहूर कार मैगजीन की रिसर्च में 11 मॉडर्न कारों के टचस्क्रीन और 2005 की Volvo V70 के फिजिकल बटन का तुलनात्मक अध्ययन किया गया. इसमें ड्राइवरों को 110 KM की रफ्तार से कार चलाते हुए एसी, रेडियो और अन्य कंट्रोल ऑपरेट करने को कहा गया.
रिसर्च में पाया गया कि टचस्क्रीन वाली कारों में साधारण काम पूरा करने में 20 सेकंड या उससे अधिक समय लग गया, जबकि फिजिकल बटन वाली कारों में यही काम 10 सेकंड से भी कम समय में हो गया. इसका कारण यह है कि बटन और नॉब को ड्राइवर बिना देखे भी इस्तेमाल कर सकता है, जबकि टचस्क्रीन में बार-बार नजर सड़क से हटाना पड़ती है.
यूरोप की प्रमुख व्हीकल सेफ्टी एजेंसी Euro NCAP ने भी टचस्क्रीन पर चेतावनी दी है. एजेंसी के अनुसार, फिजिकल बटन और नॉब ड्राइविंग के दौरान कम ध्यान भटकाते हैं, क्योंकि इन्हें ऑपरेट करने के लिए आंखें सड़क से नहीं हटानी पड़ती. वहीं, टचस्क्रीन में मेनू नेविगेशन या अन्य ऑपरेशन के लिए पूरा ध्यान देना पड़ता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि टचस्क्रीन के साथ फिजिकल बटन और वॉइस कमांड के विकल्प भी होने चाहिए, ताकि ड्राइवर का ध्यान हमेशा सड़क पर बना रहे. Euro NCAP जैसे मानक जल्द ही ऐसे नियम लागू कर सकते हैं, जिससे कार निर्माता सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस डिजाइन करें.
हाल की ट्रांसपोर्ट रिसर्च लैबोरेटरी की स्टडी में पाया गया कि टचस्क्रीन का इस्तेमाल करते समय ड्राइवर का रिएक्शन टाइम 57% तक बढ़ सकता है, जो शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव के बराबर माना जाता है. इसका मतलब है कि ड्राइवर सड़क की स्थितियों पर प्रतिक्रिया देने में देर कर सकता है, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है.
Euro NCAP ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी कारों को 5-स्टार सुरक्षा रेटिंग देना मुश्किल हो सकता है, जिनमें केवल टचस्क्रीन के जरिए जरूरी काम किए जा रहे हों. हॉर्न, विंडशील्ड वाइपर, टर्न सिग्नल और इमरजेंसी लाइट जैसे फंक्शन के लिए फिजिकल बटन होना अनिवार्य होगा.
भारतीय बाजार में बड़े टचस्क्रीन वाली कारों का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में लॉन्च हुई महिंद्रा XUV 7X, बीई 6, टाटा सिएरा, किआ कारेंस और हुंडई क्रेटा जैसी कारों में 10 इंच या उससे बड़े डिस्प्ले दिए जा रहे हैं. कुछ कंपनियां अब फीचर्स की रेस में कार से पेमेंट करने और हैंड-वेव से दरवाजे खोलने जैसे फैंसी ऑप्शन्स भी दे रही हैं.
टचस्क्रीन से कुछ फायदे भी हैं. यह नेविगेशन, कनेक्टिविटी और एंटरटेनमेंट को एक ही स्क्रीन पर नियंत्रित करने की सुविधा देता है, जो पारंपरिक बटन सिस्टम से संभव नहीं होता. मॉडर्न ड्राइविंग एक्सपीरियंस बेहतर होता है, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखना जरूरी है. First Updated : Saturday, 17 January 2026