जंतर-मंतर पर Bluetooth से हो रही चैटिंग, प्रदर्शनकारियों का नया 'डिजिटल हथियार'
ब्लूटूथ आधारित यह मैसेजिंग तकनीक बिना इंटरनेट कवरेज के भी लोगों को आपस में जोड़े रखने का एक नया और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रही है. हाल ही में चर्चा में आई 'Bitchat' जैसी नई ऐप्स इस दिशा में क्रांति ला रही हैं.

नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि बिना किसी मोबाइल नेटवर्क, Wi-Fi कनेक्शन या मोबाइल डेटा के भी एक फोन से दूसरे फोन में मैसेज भेजा जा सकता है? आधुनिक तकनीक के दौर में अब यह केवल एक कल्पना नहीं रह गया है. हाल ही में चर्चा में आई 'Bitchat' जैसी नई ऐप्स इस दिशा में क्रांति ला रही हैं. ब्लूटूथ आधारित यह मैसेजिंग तकनीक बिना इंटरनेट कवरेज के भी लोगों को आपस में जोड़े रखने का एक नया और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रही है.
SMS से शुरू हुआ डिजिटल मैसेजिंग का सफर
मोबाइल मैसेजिंग की शुरुआत साल 1992 में हुई थी, जब दुनिया का पहला टेस्ट SMS 'Merry Christmas. भेजा गया था. उस दौर में केवल 160 कैरेक्टर्स के सीमित संदेश भेजे जा सकते थे, लेकिन इसी तकनीक ने भविष्य के डिजिटल संचार की मजबूत नींव रखी. आगे चलकर व्हाट्सएप, टेलीग्राम और वीचैट जैसे एडवांस्ड ऐप्स का दौर आया, जिन्होंने फोटो, वीडियो, वॉयस नोट्स और ग्रुप चैट जैसी आधुनिक सुविधाएं दीं. हालांकि, इन सभी पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स की सबसे बड़ी मजबूरी यह है कि इन्हें चलाने के लिए एक्टिव इंटरनेट और केंद्रीय सर्वर की आवश्यकता होती है.
ब्लूटूथ मेश नेटवर्किंग कैसे करती है काम?
अब टेक्नोलॉजी एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है. हाल ही में X के सह-संस्थापक जैक डोर्सी द्वारा पेश किया गया Bitchat ऐप हो या फिर Bridgefy, Briar और Jott जैसे अन्य प्लेटफॉर्म, ये सभी Bluetooth Mesh Networking तकनीक पर काम करते हैं. इस सिस्टम में दो या उससे अधिक स्मार्टफोन सीधे ब्लूटूथ के जरिए आपस में कनेक्ट हो जाते हैं. इसके संचालन के लिए न तो किसी सिम कार्ड की जरूरत होती है और न ही यूजर अकाउंट बनाने की. इसमें संदेश किसी तीसरे सर्वर पर जाने के बजाय सीधे एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक पहुंचता है.
आपदा और नो-नेटवर्क जोन में बनेगी जीवनरक्षक
ब्लूटूथ मैसेजिंग तकनीक उन स्थितियों में बेहद मददगार साबित होती है जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो जाता है. भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जब टेलीकॉम टॉवर ध्वस्त हो जाते हैं. बड़े म्यूज़िक कॉन्सर्ट, खेल स्टेडियम, या दूरदराज के पहाड़ी इलाकों व जंगलों में जहां नेटवर्क सिग्नल बेहद कमजोर होते हैं. कई बार आपात स्थिति में जब किसी क्षेत्र विशेष में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी जाती हैं, तब भी यह तकनीक लोकल लेवल पर मैसेज भेजने में सक्षम है.


