नई दिल्ली: 24 जून की रात दुनिया ने जियोलॉजिकल गतिविधियों का एक बेहद असामान्य और दुर्लभ घटनाक्रम देखा. बता दें, महज दो घंटे के भीतर वेनेजुएला और जापान में तीन शक्तिशाली भूकंप आए, जिन्होंने वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम अवधि में इस तरह की घटनाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं और यह 1000 से 1200 साल में एक ही बार देखती को मिलती है.
सबसे पहले दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में धरती जोरदार तरीके से कांपी और यहां करीब 40 सेकंड के अंतराल पर दो बड़े भूकंप दर्ज किए गए, जिनकी तीव्रता क्रमशः 7.2 और 7.5 मापी गई. भूकंप विज्ञान में ऐसी स्थिति, जब एक ही क्षेत्र में लगभग समान तीव्रता के दो बड़े झटके बहुत कम समय के अंतराल में आते हैं, उसे डबलेट अर्थक्वेक कहा जाता है.
इन झटकों के कारण कई इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है. इसके साथ ही कई भवन ढह गए, जबकि कई इमारतों में बड़ी दरारे आई हैं. घटना के बाद क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं. घटना के बाद हुए और हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी है. वहीं शुरुआती रिपोर्टों में भारी जनहानि की आशंका जताई गई है, हालांकि आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार है। इसके साथ ही इसे सदी का सबसे बड़ा भूकंप मनाया का रहा है.
भूकंप के बाद कैरिबियन क्षेत्र और प्यूर्टो रिको के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी. हालांकि बाद में इसे वापस ले लिया गया, क्योंकि भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर नहीं बल्कि जमीन के नीचे स्थित था. हालांकि एहतियात के तौर पर कुछ क्षेत्रों में दोबारा अलर्ट जारी किया गया.
वेनेजुएला की घटना के लगभग दो घंटे बाद जापान के उत्तरी हिस्से में भी 6.9 तीव्रता का भूकंप आया. इवाते और अओमोरी प्रांत के आसपास महसूस किए गए इस झटके से लोगों में दहशत फैल गई. इसके बावजूद किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है. जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने स्पष्ट किया कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है और क्षेत्र के सभी परमाणु ऊर्जा संयंत्र सुरक्षित हैं. लगातार तीन बड़े भूकंपों के बावजूद किसी विनाशकारी सुनामी का न आना दुनिया के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है. First Updated : Thursday, 25 June 2026