पश्चिम बंगाल में BJP के जीत के बाद बांग्लादेश का यू-टर्न, बोले- भारत नहीं, अब चीन से बढ़ाएंगे रिश्ते

पड़ोसी बांग्लादेश ने बयान जारी करते हुए कहा कि वह अब भारत का तीस्ता एग्रीमेंट को फाइनल करने का इंतजार नहीं करेगा जो सालों से रुका हुआ है.

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Edited By: JBT Desk

New Delhi: पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के तुरंत बाद पड़ोसी बांग्लादेश ने एक अहम बयान जारी किया है. बांग्लादेश ने कहा है कि वह अब भारत का तीस्ता एग्रीमेंट को फाइनल करने का इंतजार नहीं करेगा जो सालों से रुका हुआ है. बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने मंगलवार को एक बयान में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अब भारत का तीस्ता एग्रीमेंट को फाइनल करने का इंतजार नहीं कर सकता और इसलिए वह चीन का रुख करेगा.

बांग्लादेश नहीं करेगा भारत का इंतजार

डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने इस एग्रीमेंट को अपने देश के लिए बहुत जरूरी बताया. खलीलुर रहमान जल्द ही चीन जाने वाले हैं. बीजिंग के अपने ऑफिशियल दौरे से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तीस्ता प्रोजेक्ट चीन में बातचीत के एजेंडा में होगा. बांग्लादेश अब भारत का तीस्ता एग्रीमेंट को फाइनल करने का इंतजार नहीं कर सकता.

 BJP सरकार के बारे में रहमान ने क्या कहा?

बांग्लादेशी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब BJP पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने वाली है. BJP की जीत के बारे में सवालों के जवाब में रहमान ने कहा, पश्चिम बंगाल में अभी सरकार नहीं बनी है. वे क्या सोचते हैं या क्या करेंगे यह उन्हें ही बताना है. उनके मन की बात पढ़ना मेरा काम नहीं है. हम खाली नहीं बैठ सकते हमें अपना काम करना है.

तीस्ता नदी पर क्या विवाद है?

तीस्ता नदी को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है. बांग्लादेश नदी में बराबर का हिस्सा चाहता है लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार इसका विरोध करती है. जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 2011 में बांग्लादेश आए थे, तो इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की गई थी. एक प्लान के तहत तीस्ता का लगभग 37.5 प्रतिशत पानी बांग्लादेश को और 42.5 प्रतिशत पानी भारत को मिलेगा. बंगाल के विरोध के कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका.

1983 में हुआ था एग्रीमेंट

दोनों देशों के बीच 1983 में एक टेम्पररी एग्रीमेंट हुआ था जिसके तहत बांग्लादेश को 36 परसेंट और भारत को 39 परसेंट पानी दिया जाना था. बाकी 25 परसेंट का मामला बाद में सुलझाया जाना था. यह एग्रीमेंट पूरी तरह से लागू नहीं हुआ. 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के दौरान बांग्लादेश को उम्मीद थी कि कोई हल निकलेगा लेकिन कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ. भारत और बांग्लादेश 54 नदियों का हिस्सा हैं लेकिन सिर्फ दो पर एग्रीमेंट हुआ है गंगा और कुशियारा. बाकी नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद बना हुआ है.

चीन से मदद मांगेंगे

तीस्ता एग्रीमेंट में देरी को देखते हुए बांग्लादेश ने 2019 में "तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट" शुरू किया और शेख हसीना के बीजिंग दौरे के दौरान चीन से मदद मांगी. रहमान ने एक बार फिर चीन से मदद मांगने की बात कही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक रहमान इस तीन दिन के दौरे के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मिलेंगे.

इस दौरे के दौरान, बांग्लादेश तीस्ता समझौते में मदद और चीन से कम ब्याज दरों पर लोन मांगेगा. बांग्लादेश चीन से इन्वेस्टमेंट भी मांगेगा. जुलाई में हुए विद्रोह के बाद चीनी इन्वेस्टमेंट धीमा हो गया था लेकिन नई सरकार अब इसे तेज करना चाहती है. चीन ने बांग्लादेश को अपना करीबी पड़ोसी और स्ट्रेटेजिक पार्टनर बताते हुए रिश्तों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है.

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