बंगाल में अगर किसी को नहीं मिला बहुमत को कौन बनेगा किंगमेकर? कांग्रेस ने सस्पेंस रखा बरकरार

पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने टीएमसी को समर्थन देने पर फैसला टालते हुए कहा कि परिणाम के बाद ही स्थिति साफ होगी. एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त दिख रही है, जिससे मुकाबला रोमांचक हो गया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. संभावित त्रिशंकु विधानसभा की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गठबंधन को लेकर फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है. उनसे यह सवाल किया गया कि यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो क्या कांग्रेस तृणमूल कांग्रेस का समर्थन करेगी.

खड़गे ने जवाब देने से किया परहेज

इस पर खड़गे ने सीधे तौर पर कोई स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया. उन्होंने कहा कि अभी इस मुद्दे पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी और सही स्थिति समझने के लिए परिणाम आने तक इंतजार करना जरूरी है. उनका संकेत साफ था कि पार्टी चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही अपनी रणनीति तय करेगी.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए गए. मतदान को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और रिकॉर्ड स्तर पर वोटिंग दर्ज की गई. खास बात यह रही कि दूसरे और अंतिम चरण में भारी संख्या में मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से भी ज्यादा रही. इसे लोकतंत्र के लिहाज से एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.

4 मई पर सबकी नजरें 

अब सभी की निगाहें 4 मई पर टिकी हैं, जब मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि राज्य में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिलता है या फिर गठबंधन की सरकार बनानी पड़ेगी. चुनाव नतीजे ही यह तय करेंगे कि सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाएगी.

इस बीच, एग्जिट पोल ने राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है. अधिकांश सर्वेक्षणों में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई गई है, जो मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है. कुछ प्रमुख एजेंसियों के अनुमानों के अनुसार भाजपा इस बार बड़ी संख्या में सीटें हासिल कर सकती है.

एक सर्वे के मुताबिक भाजपा को 146 से 161 सीटों तक जीत मिलने की संभावना जताई गई है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस को पिछली बार की तुलना में नुकसान हो सकता है और उसे लगभग 125 से 140 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है. अन्य दलों के खाते में सीमित सीटें जाने का अनुमान है.

हालांकि, ये सभी आंकड़े केवल एग्जिट पोल पर आधारित हैं. असली तस्वीर 4 मई को सामने आएगी, जिसके बाद ही यह तय होगा कि बंगाल में किसकी सरकार बनेगी और किसे सत्ता से बाहर रहना पड़ेगा.

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