अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ीं, ₹2220 करोड़ बैंक फ्रॉड केस में CBI ने दर्ज की नई एफआईआर

उद्योगपति अनिल अंबानी एक बार फिर जांच के घेरे में हैं। CBI ने बैंक फ्रॉड मामले में नई एफआईआर दर्ज की है। इसमें हजारों करोड़ के लोन के गलत इस्तेमाल के आरोप हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

उद्योगपति अनिल अंबानी की परेशानियां फिर बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उनके खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की है। यह मामला बैंक ऑफ बड़ौदा से लिए गए लोन से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत के आधार पर एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है। केस दर्ज होते ही कई जगह तलाशी अभियान भी चलाया गया। जांच में लोन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब पूरे वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

फ्रॉड का आरोप क्या है?

सीबीआई के मुताबिक रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे जुड़ी कंपनियों पर बैंक को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। दावा है कि 2013 से 2017 के बीच करीब 2220 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आरोप है कि लोन की राशि तय शर्तों के अनुसार इस्तेमाल नहीं हुई। जांच एजेंसी का कहना है कि रकम को अन्य कंपनियों के जरिए घुमाया गया। इससे बैंक की स्थिति प्रभावित हुई। अब इस पूरे वित्तीय प्रवाह की जांच हो रही है। एजेंसी आरोपों की पुष्टि के लिए सबूत जुटा रही है।

तलाशी में क्या मिला?

एफआईआर दर्ज होने के बाद सीबीआई ने कई ठिकानों पर छापेमारी की। अनिल अंबानी के ठिकानों और रिलायंस कम्युनिकेशंस के दफ्तरों में जांच हुई। तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए। एजेंसी इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। लोन वितरण और उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच का फोकस फंड के इस्तेमाल पर है। अधिकारियों ने प्रक्रिया को जारी रखने की बात कही है।

बैंक की शिकायत क्यों अहम?

यह केस बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर दर्ज किया गया है। बैंक ने लोन के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है। शिकायत में वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र किया गया। बैंक का कहना है कि लोन की शर्तों का पालन नहीं हुआ। इसी आधार पर एजेंसी ने मामला दर्ज किया। बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा के लिहाज से केस महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के नतीजे आगे की कार्रवाई तय करेंगे।

क्या पहले भी विवाद रहे?

अनिल अंबानी की कंपनियां पहले भी वित्तीय चुनौतियों से गुजर चुकी हैं। रिलायंस कम्युनिकेशंस लंबे समय से कर्ज संकट का सामना कर रही थी। कई मामलों में लोन डिफॉल्ट की खबरें आई थीं। हालांकि हर केस अलग परिस्थितियों से जुड़ा रहा है। मौजूदा जांच बैंक फ्रॉड के आरोपों से संबंधित है। एजेंसी सभी पहलुओं की जांच कर रही है। कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

जांच का अगला कदम क्या?

सीबीआई अब दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। संबंधित अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों से पूछताछ संभव है। बैंक और अन्य एजेंसियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच का उद्देश्य वित्तीय प्रवाह की सच्चाई सामने लाना है। यदि आरोप साबित होते हैं तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल एजेंसी सबूत जुटाने में जुटी है। मामले पर सभी की नजर बनी हुई है।

बिजनेस जगत पर क्या असर?

इस केस ने कॉरपोरेट सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है। बैंकिंग फ्रॉड मामलों पर निगरानी कड़ी होने की उम्मीद है। निवेशकों की नजर भी इस जांच पर है। विशेषज्ञ इसे वित्तीय पारदर्शिता के लिहाज से अहम मानते हैं। कॉरपोरेट गवर्नेंस पर चर्चा तेज हो सकती है। जांच के नतीजे भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल मामला कानूनी प्रक्रिया में है।

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