नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 में इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र, खासकर पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को नई दिशा देने की कोशिश की गई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना लगातार नौवां बजट पेश करते हुए आयुर्वेद और आयुष प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कई अहम घोषणाएं कीं. सरकार का जोर इस बात पर है कि देश के लोगों को पारंपरिक इलाज की बेहतर सुविधाएं मिल सके.
वित्त मंत्री ने देश में आयुर्वेद के तीन नए आल इंडिया इंस्टीट्यूट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है. इन संस्थानों का उद्देश्य सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां शिक्षा, शोध और आधुनिक नैदानिक सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा को वैज्ञानिक आधार के साथ आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और नए विशेषज्ञ तैयार होंगे.
आयुष फार्मेसियों का आधुनिकीकरण
सरकार ने देशभर में चल रही आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड करने की भी घोषणा की है. इसका मकसद दवाओं की गुणवत्ता बेहतर करना और मरीजों तक सुरक्षित व प्रमाणित दवाएं पहुंचाना है. साथ ही इस क्षेत्र में अधिक प्रशिक्षित और कुशल कर्मियों की तैनाती पर भी जोर दिया जाएगा.
मेडिकल टूरिज्म और वैश्विक पहचान
सीतारमण ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों के सहयोग से देश में चिकित्सा पर्यटन के लिए पांच विशेष केंद्र स्थापित करेगी. इससे भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा. इसी दिशा में गुजरात के जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को भी और विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि भारत पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं में नेतृत्व की भूमिका निभा सके.
मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
बजट में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिकता दी गई है. उत्तर भारत में राष्ट्रीय स्तर का कोई बड़ा मानसिक स्वास्थ्य संस्थान नहीं होने की बात कहते हुए वित्त मंत्री ने एनआईएमएनएचएस-2 स्थापित करने का ऐलान किया. इसके अलावा रांची और तेजपुर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा. इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा.
आपातकालीन और ट्रॉमा केयर का विस्तार
सरकार ने यह भी माना कि अचानक आने वाली आपात स्थितियां गरीब और कमजोर परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालती हैं. इसे देखते हुए जिला अस्पतालों में आपातकालीन और ट्रॉमा केयर केंद्रों की संख्या में 50 प्रतिशत तक वृद्धि करने की योजना बनाई गई है. इससे गंभीर हालात में मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा और जीवन बचाने की संभावना बढ़ेगी. First Updated : Sunday, 01 February 2026