GST Impact: केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित जीएसटी स्लैब युक्तिकरण का असर सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत पर पड़ने वाला है. सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव से न केवल खपत बढ़ेगी, बल्कि ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाओं, सीमेंट और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे अहम क्षेत्रों में भी काफी सुधार देखने को मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यात्री और वाणिज्यिक वाहन, जो फिलहाल 28% जीएसटी स्लैब में आते हैं, अगर 18% के स्लैब में शिफ्ट किए जाते हैं तो कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को बड़ा लाभ होगा. इस स्थिति में वाहनों की कीमतें कम होंगी और बिक्री का ग्राफ ऊपर बढ़ जाएगा.
रिपोर्ट में कहा गया है, मारुति, टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड को कम प्रभावी कीमतों और ज्यादा बिक्री से फायदा होगा. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि घरेलू खपत बढ़ने के साथ वाहन वित्तपोषण की मांग में भी उछाल आएगा.
रिपोर्ट के अनुसार, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खुदरा ऋण वृद्धि में तेजी देख सकते हैं. वहीं, बजाज फाइनेंस को उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं पर कम ईएमआई का सीधा फायदा होगा.
बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी यह बदलाव सकारात्मक रहेगा. अगर सीमेंट पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया जाता है तो इसकी कीमतों में 7-8% तक की गिरावट संभव है. ऐसे में निर्माण कार्य की लागत घटेगी और सीमेंट कंपनियों की बिक्री में बढ़ोतरी होगी.
रिपोर्ट में बताया गया कि एचयूएल और ब्रिटानिया जैसी कंपनियों को कम इनपुट लागत से फायदा मिलेगा, क्योंकि कई कच्चे माल निचले जीएसटी स्लैब में आ जाएंगे. साथ ही वोल्टास, हैवेल्स और एम्बर एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों की बिक्री में भी बढ़ोतरी हो सकती है.
आतिथ्य उद्योग की कंपनियां जैसे लेमन ट्री और इंडियन होटल्स किफायती सेवाओं के कारण अधिक ग्राहकों को आकर्षित कर सकेंगी. वहीं, अगर सीनियर सिटीजन की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया जाए या पूरी तरह माफ कर दी जाए, तो निवा बूपा, मैक्स लाइफ, एचडीएफसी लाइफ और स्टार हेल्थ जैसी बीमा कंपनियों को जबरदस्त फायदा होगा.
खपत बढ़ने का सीधा असर डेल्हीवरी जैसी लॉजिस्टिक्स कंपनियों और स्विगी व इटरनल जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी पड़ेगा. मांग बढ़ने के चलते इनके कारोबार में तेजी आने की संभावना है.
फुटवियर और अन्य बड़े पैमाने पर उत्पादित वस्तुओं को निचले स्लैब में स्थानांतरित करने से कर-अंतरपणन की समस्या घटेगी. इससे रिलैक्सो, बाटा और कैम्पस जैसे संगठित खिलाड़ियों को सीधा फायदा होगा और असंगठित क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा कम होगी. First Updated : Tuesday, 19 August 2025