India Energy Security: होर्मुज तनाव के बाद भारत ने बदला तेल और LNG आयात का रूट

अमेरिका-ईरान तनाव के चलते होर्मुज जलमार्ग से LNG निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई है. हालात को देखते हुए भारत ने कच्चे तेल और LNG के आयात के लिए UAE और ओमान के वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना शुरू कर दिया है.

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है. फारस की खाड़ी से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के निर्यात में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलमार्ग में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिसके चलते एलएनजी की सप्लाई पर दबाव बना हुआ है.

वहीं इस स्थिति को देखते हुए भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान के रास्ते कच्चे तेल और एलएनजी का आयात बढ़ाना शुरू कर दिया है. इसका उद्देश्य होर्मुज जलमार्ग पर बढ़ते जोखिम के बीच ईंधन की आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट से बचना है.

तेल निर्यात बाधित करने का दिया संकेत 

तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने संकेत दिया कि अगर उसके तेल निर्यात को बाधित किया गया, तो वह क्षेत्र के अन्य प्रमुख ऊर्जा मार्गों, जैसे फुजैराह पाइपलाइन और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को भी निशाना बना सकता है. ऐसे हालात वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं.

किस महीने कितने जहाज गुजरे 

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, जून के अंत तक जहां इस मार्ग से प्रतिदिन औसतन 0.8 एलएनजी जहाज गुजर रहे थे, वहीं जुलाई के मध्य तक यह संख्या घटकर करीब 0.2 जहाज प्रतिदिन रह गई. हाल के दिनों में फारस की खाड़ी से बहुत कम एलएनजी जहाज बाहर निकल पाए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण शिपिंग कंपनियां इस मार्ग का इस्तेमाल करने से बच रही हैं.

दिलचस्प बात यह है कि कतर और यूएई की प्रमुख ऊर्जा कंपनियों में एलएनजी का उत्पादन और जहाजों पर लोडिंग सामान्य रूप से जारी है. समस्या उत्पादन में नहीं, बल्कि जहाजों की आवाजाही में आ रही है. इसके चलते बड़ी मात्रा में एलएनजी से भरे टैंकर फारस की खाड़ी के भीतर ही रुके हुए हैं.

भारत पर पड़ सकता है असर 

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है. ऐसे में अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो वैकल्पिक मार्गों से आयात करने के कारण परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही समुद्री मार्ग सामान्य होंगे, खाड़ी में रुका एलएनजी तेजी से वैश्विक बाजार में पहुंचेगा, जिससे आपूर्ति सुधरेगी और भारत समेत कई देशों को राहत मिल सकती है. First Updated : Saturday, 18 July 2026