PoK में हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र सख्त, पाकिस्तान से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
संयुक्त राष्ट्र ने PoK में बढ़ती हिंसा और राजनीतिक तनाव पर चिंता जताते हुए प्रदर्शनकारियों व सुरक्षाकर्मियों की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की है. 27 जुलाई के विधानसभा चुनाव से पहले UN ने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है.

नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बढ़ती हिंसा और राजनीतिक तनाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इलाके में हालात पर नजर रखते हुए प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की मौत की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. यह अपील ऐसे समय आई है जब 27 जुलाई को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है.
शांति बनाए रखने की अपील
जिनेवा से जारी बयान में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि हाल के सप्ताहों में हुई हिंसक घटनाओं में कई लोगों की जान गई है, जिनमें बड़ी संख्या प्रदर्शनकारियों की बताई जा रही है. कुछ सुरक्षाकर्मियों की मौत भी हुई है. ऐसे में हर मौत की पारदर्शी और स्वतंत्र जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और जवाबदेही तय हो.
संयुक्त राष्ट्र ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर भी चिंता जताई है. पाकिस्तान ने इस संगठन को सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित किया है. इसके बाद संगठन के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है.
कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की अपील
मानवाधिकार कार्यालय का कहना है कि किसी नागरिक संगठन को आपराधिक घोषित करना और लोगों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार पर रोक लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है. एजेंसी ने अधिकारियों से अपील की है कि हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए, उन्हें अपने परिवारों से संपर्क करने की अनुमति मिले और न्यायिक प्रक्रिया के सभी अधिकार सुनिश्चित किए जाएं.
पाबंदियों को लेकर जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र ने क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं पर लगी पाबंदियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है. एजेंसी का कहना है कि संचार सेवाओं पर प्रतिबंध से आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और सूचना तक पहुंच प्रभावित होती है. इसलिए इंटरनेट सेवाएं जल्द से जल्द पूरी तरह बहाल की जानी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान और स्थानीय प्रशासन से आग्रह किया है कि वे क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए सभी पक्षों को साथ लेकर सार्थक राजनीतिक संवाद शुरू करें. एजेंसी का मानना है कि लोगों की शिकायतों और मूलभूत समस्याओं का समाधान केवल बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए ही संभव है.


