क्या ईरान पर होने वाला है सबसे बड़ा हमला? अमेरिका ने इजराइल भेजने शुरू किए दर्जनों रिफ्यूलिंग विमान
अमेरिका इजराइल में अतिरिक्त एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान भेजने की तैयारी कर रहा है, जिससे ईरान के खिलाफ लंबी दूरी के संभावित सैन्य अभियानों की क्षमता बढ़ सकती है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सैन्य गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका इजराइल में अतिरिक्त एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान भेजने की तैयारी कर रहा है. माना जा रहा है कि इन विमानों का उद्देश्य लंबी दूरी तक लड़ाकू और बॉम्बर विमानों के अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना है. हालांकि, संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.
क्यों बढ़ाई जा रही है रिफ्यूलिंग विमानों की संख्या?
बताया जा रहा है कि इजराइल में पहले से बड़ी संख्या में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान मौजूद हैं. अब अतिरिक्त विमानों की तैनाती की योजना बनाई जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान हवा में ही ईंधन भरकर लंबी दूरी तक मिशन पूरा कर सकें. इससे सैन्य अभियानों की क्षमता और समय दोनों बढ़ सकते हैं.
अमेरिका किन विकल्पों पर कर रहा है विचार?
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ईरान को लेकर कई सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है. इनमें रणनीतिक ठिकानों, ऊर्जा ढांचे और परमाणु सुविधाओं को संभावित लक्ष्य बनाने जैसे विकल्प शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि इन योजनाओं पर आधिकारिक पुष्टि या अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है.
क्षेत्र में बढ़ रहा है तनाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज क्षेत्र और ईरान के दक्षिणी हिस्सों में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं. वहीं दूसरी ओर ईरान भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को लेकर कड़े बयान दे रहा है. दोनों देशों के बीच जारी तनाव ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को संवेदनशील बना दिया है.
इजराइल में क्यों शुरू हुआ राजनीतिक विवाद?
अमेरिकी सैन्य विमानों की बढ़ती मौजूदगी अब इजराइल की घरेलू राजनीति का भी मुद्दा बन गई है. गर्मियों की छुट्टियों के दौरान हवाई यातायात बढ़ने से बड़े सैन्य विमानों की पार्किंग को लेकर चिंता जताई जा रही है. कुछ नेताओं का मानना है कि इससे आम यात्री उड़ानों पर असर पड़ सकता है, जबकि रक्षा प्रतिष्ठान इसे सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी बता रहा है.
स्थिति पर दुनिया की नजर
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.


