1 अप्रैल 2026 से देशभर में नए श्रम कानून लागू होने जा रहे हैं. ये बदलाव कर्मचारियों की सैलरी संरचना, ओवरटाइम नियम, काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को पूरी तरह नया रूप देंगे. केंद्र सरकार ने चारों लेबर कोड के नियम लगभग तैयार कर लिए हैं, जिसका सीधा असर करोड़ों कर्मचारियों और कंपनियों पर पड़ेगा. ये ऐतिहासिक सुधार 44 पुराने श्रम कानूनों को एक सरल और पारदर्शी ढांचे में समेटेंगे. इससे श्रमिकों के अधिकार मजबूत होंगे और नियोक्ताओं को भी लचीलापन मिलेगा.
चार नए श्रम कोड वेतन संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता हैं. इनका मुख्य उद्देश्य 44 पुराने श्रम कानूनों को एक सरल ढांचे में समेटना है. इनमें कुल 29 प्रावधान होंगे, जिससे पहले की जटिल कानूनी व्यवस्था सरल और पारदर्शी हो जाएगी. सरकार ने इन कोडों को 21 नवंबर 2025 से अधिसूचित कर दिया था, और ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक सलाह के लिए रखा गया था. जनवरी तक आए सुझावों के बाद मंत्रालय ने केंद्रीय स्तर पर इनके क्रियान्वयन के नियमों को अंतिम रूप दे दिया है.
नए श्रम कोडों के तहत, काम के मानक घंटे पहले की तरह 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे साप्ताहिक रहेंगे. हालांकि, इनमें काम करने के तरीकों को लेकर अधिक फ्लेक्सिबल बनाया गया है. नियोक्ता अब कर्मचारियों को फ्लेसिबल वर्किंग कल्चर दे सकेंगे. साप्ताहिक काम के घंटों के प्रबंधन के आधार पर अतिरिक्त ओवरटाइम विकल्प भी उपलब्ध होंगे. ओवरटाइम की यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय श्रम प्रैक्टिसेज के अनुरूप रखी गई है, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को लचीलापन मिलेगा, लेकिन श्रमिकों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित रहेगी.
नए श्रम कोड का एक प्रमुख उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना है. सरकार मार्च 2026 तक सामाजिक सुरक्षा लाभों को 100 करोड़ श्रमिकों तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है, जबकि वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 94 करोड़ है.यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 2015 में सामाजिक सुरक्षा कवरेज मात्र 19 प्रतिशत थी, जो 2025 तक बढ़कर 64 प्रतिशत से अधिक हो गई है. अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर, साथ ही स्वरोजगार करने वाले लोग भी शामिल होंगे.
नए श्रम कोडों में पारदर्शिता और श्रमिक संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं. अब सभी कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा, जिससे रोजगार की औपचारिक मान्यता सुनिश्चित होगी. नए लेबर कोड में समान काम के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए समान अवसरों की व्यवस्था की गई है. महिलाएं अब उचित सुरक्षा प्रबंधों के साथ अलग-अलग शिफ्टों में भी काम कर सकेंगी. इसके अलावा, 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों को मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच का अधिकार दिया गया है.
नई व्यवस्था में ओवरटाइम को रेगुलराइज्ड किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप श्रमिकों के लिए एक विकल्प के रूप में पेश किया जाएगा. इससे उद्योगों को काम के उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि अतिरिक्त घंटों के काम के लिए श्रमिकों को उचित मुआवजा मिले. यह कदम नौकरी देने वालों और लेने वालों दोनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करता है. First Updated : Tuesday, 31 March 2026