'भारतीय जहाजों पर हमला बर्दाश्त नहीं', ट्रंप का ईरान पर बड़ा आरोप, समझौते से पहले बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कड़ी चेतावनी दी है.

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है. संभावित समझौते से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक सख्त संदेश जारी करते हुए ईरान पर गंभीर आरोप लगाए और उसे अपनी गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी.
ट्रंप का दावा
ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी. उन्होंने कहा कि हाल ही में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमले का प्रयास किया गया, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते उसे विफल कर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस कथित घटना के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह की गतिविधियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं.
उन्होंने कहा कि भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश बेहद गंभीर मामला है और ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा करते हैं. ट्रंप ने ईरान से अपनी नीतियों और व्यवहार में तत्काल बदलाव लाने की मांग करते हुए कहा कि दुनिया अब इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं करेगी.
अपने बयान में ट्रंप ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें कथित तौर पर अमेरिका-ईरान समझौते की कुछ शर्तों के सार्वजनिक होने का दावा किया गया था. उन्होंने कहा कि मीडिया में सामने आई जानकारी वास्तविक वार्ता से मेल नहीं खाती और जो शर्तें सार्वजनिक की गई हैं, उनका प्रस्तावित समझौते से कोई संबंध नहीं है. ट्रंप के अनुसार, समझौते को लेकर फैलाई जा रही कई बातें भ्रामक और तथ्यहीन हैं.
ईरान की कूटनीतिक रणनीति
ईरान की कूटनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने कहा कि तेहरान की ओर से लगातार विरोधाभासी संकेत दिए जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान ईमानदारी और पारदर्शिता का अभाव रहा है, जिससे विश्वास कायम करना मुश्किल हो जाता है. ट्रंप ने ईरान के रवैये को निराशाजनक बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों में स्पष्टता और भरोसा सबसे महत्वपूर्ण तत्व होते हैं.
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में ईरान की सरकारी मीडिया की वह रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया था कि किसी भी संभावित समझौते के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका प्रभाव और नियंत्रण बना रहेगा. इसके बाद ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को और उजागर कर दिया है.
विश्लेषकों का मानना है कि संभावित समझौते से पहले दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का यह दौर कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान ने यह संकेत जरूर दिया है कि वार्ता के अंतिम चरण में भी दोनों देशों के बीच मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.


