1 जुलाई से बदल जाएगा CBSE का नियम, 9वीं-10वीं में लागू होगा नया थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला

कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं जिन्हें R1, R2 और R3 के रूप में नामित किया गया है पढ़ना अनिवार्य होगा. इन तीन भाषाओं में से यह अनिवार्य है कि कम से कम दो भाषाएं मूल भारतीय भाषाएं हों.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन जिसे 'त्रि-भाषा नियम' कहा जाता है पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है. यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा. CBSE के इस फैसले के परिणामस्वरूप छात्रों को अब अपनी पढ़ाई में भाषाओं को ज्यादा महत्व देना होगा.

बोर्ड ने क्या कहा

बोर्ड ने साफ किया है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है. बोर्ड ने 15 मई को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी करके सभी स्कूलों को इस नए फैसले के बारे में जानकारी दी. अपने सर्कुलर में CBSE ने कहा कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (NCF-SE) 2023 के अनुसार लिया गया है. कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं जिन्हें R1, R2 और R3 के रूप में नामित किया गया है पढ़ना अनिवार्य होगा. इन तीन भाषाओं में से यह अनिवार्य है कि कम से कम दो भाषाएं मूल भारतीय भाषाएं हों.

फैसला 1 जुलाई से सभी स्कूलों में लागू होगा

बोर्ड ने कहा कि भाषाओं से जुड़ा यह फैसला 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के लिए हाल ही में जारी NCERT पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के बाद लिया गया है. शैक्षणिक सत्र अप्रैल 2026 में शुरू हो गया था लेकिन स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे 1 जुलाई से तीसरी भाषा (R3) पढ़ाना शुरू करें. CBSE ने साफ किया है कि इस साल कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं में R3 यानी तीसरी भाषा के लिए कोई परीक्षा नहीं होगी.

कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है

स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे इन पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ राज्य-स्तरीय साहित्यिक सामग्री जिसमें कविताएं, छोटी कहानियां और काल्पनिक रचनाएं उपलब्ध कराएं. CBSE ने स्वीकार किया है कि कुछ स्कूलों को भारतीय मूल की भाषाओं के लिए योग्य शिक्षकों की व्यवस्था करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. स्कूलों को हाइब्रिड टीचिंग में मदद के लिए दूसरे स्कूलों के संसाधनों का इस्तेमाल करने, रिटायर हो चुके भाषा शिक्षकों को नियुक्त करने और योग्य पोस्टग्रेजुएट शिक्षकों को रखने की अनुमति दी गई है.

पढ़नी होंगी 3 भाषाएं

नए फ्रेमवर्क के तहत अब छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा. इनमें से, कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होनी चाहिए. विदेशी भाषाओं को केवल तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुना जा सकता है. CBSE ने स्वीकार किया है कि कई स्कूलों को नई भाषाओं के लिए शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ सकता है. इस समस्या को हल करने के लिए बोर्ड ने स्कूलों को कई अंतरिम विकल्प दिए हैं.

वर्चुअल कक्षाएं आयोजित

स्कूल आपस में संसाधनों को साझा कर सकते हैं या वर्चुअल कक्षाएं आयोजित कर सकते हैं. इन भाषाओं को पढ़ाने के लिए रिटायर हो चुके शिक्षकों या योग्य पोस्टग्रेजुएट उम्मीदवारों को नियुक्त किया जा सकता है. जब तक नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं तब तक छात्र कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करके तीसरी भाषा का अध्ययन करेंगे.

80 नंबर की एक कॉमन परीक्षा

2026–27 के एकेडमिक सेशन से मैथ्स और साइंस में दो-स्तरीय व्यवस्था लागू होगी. सभी छात्र मैथ्स का स्टैंडर्ड सिलेबस पढ़ेंगे जिसमें तीन घंटे की 80 नंबर की एक कॉमन परीक्षा शामिल होगी. वहीं एडवांस हिस्से में एक अलग से 25 नंबर का पेपर होगा जो छात्रों की उच्च-स्तरीय सोच कौशल की जांच करेगा. यह नया सिलेबस मैथ्स की मौजूदा बेसिक और स्टैंडर्ड व्यवस्था की जगह लेगा.

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