नई दिल्ली: दक्षिण भारतीय फिल्मों की आवाज़ और 'साउथ इंडिया की नाइटिंगेल' के नाम से मशहूर दिग्गज प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का 88 साल की उम्र में निधन हो गया। जानकी अम्मा के नाम से लाखों दिलों में बसने वाली इस गायिका ने 6 दशक तक संगीत की दुनिया पर राज किया।
2013 में केंद्र सरकार ने एस. जानकी को देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' देने का ऐलान किया था। लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। जानकी का कहना था कि भारतीय संगीत में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 'भारत रत्न' मिलना चाहिए।
उनके मुताबिक ये सम्मान उन्हें बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। अपने करियर में उन्हें 4 नेशनल फिल्म अवॉर्ड और 33 अलग-अलग स्टेट फिल्म अवॉर्ड मिले। उनकी आवाज़ ने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी सिनेमा को नई पहचान दी।
एस. जानकी का जन्म 23 अप्रैल 1938 को ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसिडेंसी में गुंटूर जिले के पल्लापाटला गांव में हुआ था। उनके पिता सिस्टला श्रीरामूर्ति आयुर्वेदिक डॉक्टर और टीचर थे। बचपन का बड़ा हिस्सा उन्होंने सिरसिल्ला में बिताया। सिर्फ 9 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला स्टेज परफॉर्मेंस दिया।
जानकी ने नादस्वरम विद्वान पैडिसवामी से संगीत की बुनियादी शिक्षा ली, लेकिन उन्होंने कभी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली। तेलुगु उनकी मातृभाषा थी, लेकिन वो तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी में भी धाराप्रवाह बोलती और लिखती थीं।
1957 में 19 साल की उम्र में तमिल फिल्म 'विधिइन विलायाट्टू' से उन्होंने प्लेबैक सिंग शुरू की। उसी साल उन्होंने 6 अलग-अलग भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए। 1959 में उनकी शादी वी. रामप्रसाद से हुई। रामप्रसाद ने उनके करियर को संवारने में बड़ी भूमिका निभाई और ज्यादातर रिकॉर्डिंग में उनके साथ रहते थे। 1997 में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया।
जानकी ने 2016 में फिल्म रिकॉर्डिंग और लाइव स्टेज से रिटायरमेंट ले लिया था। लेकिन 2018 में वो कुछ समय के लिए वापस आईं और तमिल फिल्म 'पन्नाडी' के लिए गाना गाया। इसी के साथ उनके 60 साल के संगीत सफर का अंत हुआ। जानकी अम्मा की आवाज़ आज भी हर दक्षिण भारतीय घर में गूंजती है। उनके जाने से संगीत जगत ने एक युग खो दिया है। First Updated : Saturday, 11 July 2026