नई दिल्ली: केंद्र की सत्ताधारी सरकार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' को और अधिक मजबूत और एकजुट करने की कवायद तेज हो गई है. इसी सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच यह बैठक तय समय से काफी लंबी चली. अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी की यह मुलाकात इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुलाकात हुई थी.
ममता और सोनिया की मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी की यह मुलाकात इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर करीब 50 मिनट तक मुलाकात की थी. पिछले पांच वर्षों में दोनों महिला नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की बैठक थी. इन बैक-टू-बैक बैठकों से साफ है कि विपक्ष अब नए सिरे से अपनी रणनीति तैयार कर रहा है.
88 मिनट तक लंबी बातचीत चली
इसके बाद जल्द ही टीएमसी नेतृत्व की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मुलाकात संभावित है. मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ टीएमसी नेता के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच करीब 88 मिनट तक लंबी बातचीत चली. जबकि यह बैठक केवल 45 मिनट के लिए तय थी.
बंगाल में टीएमसी की बदली रणनीति
टीएमसी का यह बदला हुआ रुख पश्चिम बंगाल में पार्टी को लगे हालिया झटकों का परिणाम है. टीएमसी के 78 विधायकों में से 59 विधायक बगावत का रास्ता चुन चुके हैं. जिससे पार्टी काफी कमजोर हुई है. इसके अलावा लोकसभा में भी पार्टी के भीतर फूट पड़ने की आशंका बनी हुई है. जबकि राज्यसभा के दो सांसद पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने क्या कहा
वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं और मुझे विलय जैसी किसी योजना की जानकारी नहीं है. लेकिन आप साफ देख सकते हैं कि बंगाल में मात खाने के बाद टीएमसी बिखर चुकी है और उसके नेता अब दौड़-भाग कर रहे हैं. लंबे समय तक उन्हें कांग्रेस नेताओं से मिलने की जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन अब वे ऐसा कर रहे हैं. First Updated : Thursday, 11 June 2026