राष्ट्रपति मुर्मू के ‘अपमान’ पर भड़के पीएम मोदी, कहा- बंगाल सरकार ने सारी हदें कीं पार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम विवाद को लेकर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता की सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'शर्मनाक और अभूतपूर्व' बताया.

पश्चिम बंगाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन को लेकर शुरू हुआ विवाद शनिवार को और गहरा गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा कार्यक्रम की व्यवस्था और राज्य सरकार की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताने के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी.
पीएम ने की राज्य सरकार की आलोचना
उन्होंने सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार की आलोचना करते हुए इस घटनाक्रम को “शर्मनाक और अभूतपूर्व” करार दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि लोकतंत्र और आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाले सभी लोग इस घटना से आहत हैं. उन्होंने कहा कि स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा ने देशवासियों को भी दुखी कर दिया है.
This is shameful and unprecedented. Everyone who believes in democracy and the empowerment of tribal communities is disheartened.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 7, 2026
The pain and anguish expressed by Rashtrapati Ji, who herself hails from a tribal community, has caused immense sadness in the minds of the people… https://t.co/XGzwMCMFrT
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी की है और राष्ट्रपति के अपमान के लिए राज्य का प्रशासन जिम्मेदार है. दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि पहले कार्यक्रम का स्थल विधाननगर तय किया गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर गोसाईंपुर क्यों कर दिया गया. राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि नए स्थल पर लोगों की संख्या अपेक्षा से काफी कम थी.
राष्ट्रपति ने क्यों जताई हैरानी?
राष्ट्रपति ने यह भी हैरानी जताई कि उनके स्वागत के लिए न तो मुख्यमंत्री ममता और न ही राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद था. उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम स्थल तक आसानी से पहुंच गईं, जबकि राज्य सरकार की ओर से यह कहा गया था कि वहां बहुत अधिक भीड़ हो सकती है. राष्ट्रपति ने भावुक अंदाज में कहा कि शायद आयोजकों को लगा होगा कि वह खाली जगह पर कार्यक्रम करके वापस चली जाएंगी.
#WATCH | Darjeeling, West Bengal | President Droupadi Murmu says, "Today was the International Santal Conference. When I came here after attending it, I realised it would have been better if it had been held here, because the area is so vast... I don't know what went through the… pic.twitter.com/zMYyvDo0Y2
— ANI (@ANI) March 7, 2026
अपने संबोधन में उन्होंने ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि वह उन्हें अपनी छोटी बहन की तरह मानती हैं और दोनों ही बंगाल की बेटियां हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि मुख्यमंत्री उनसे किसी बात पर नाराज हैं या नहीं, लेकिन उन्हें इस पूरे घटनाक्रम से दुख जरूर हुआ है.
ममता बनर्जी ने क्या कहा?
राष्ट्रपति की टिप्पणियों के बाद ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति का बयान राजनीतिक स्वरूप का है. उन्होंने अपील की कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप न हों. उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल पर टिप्पणी करने से पहले भाजपा शासित राज्यों की स्थिति पर भी नजर डालनी चाहिए.
It is extremely unfortunate that the Hon’ble President appears to be under the misinformed impression that there has been no development for Adivasi communities in Bengal. Madam, we would like to respectfully place the facts on record:
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) March 7, 2026
👉 Under Lakshmir Bhandar, the monthly… pic.twitter.com/Y8uuCAyeQt
इस विवाद में तृणमूल कांग्रेस ने भी राष्ट्रपति तक “गलत जानकारी” पहुंचने का दावा किया और राज्य सरकार की आदिवासी कल्याण योजनाओं का हवाला दिया. वहीं भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया और इसे संवैधानिक परंपराओं की अनदेखी बताया.


