इटली के एक अखबार ने दावा किया। कहा गया कि पायलट ने जानबूझकर फ्यूल स्विच बंद किए। यह खबर तेजी से फैली। सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। लेकिन AAIB ने इसे गलत बताया। एजेंसी ने कहा अभी जांच पूरी नहीं हुई। ऐसे में किसी को दोष देना ठीक नहीं।
इटली के एक अखबार ने दावा किया। कहा गया कि पायलट ने जानबूझकर फ्यूल स्विच बंद किए। यह खबर तेजी से फैली। सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। लेकिन AAIB ने इसे गलत बताया। एजेंसी ने कहा अभी जांच पूरी नहीं हुई। ऐसे में किसी को दोष देना ठीक नहीं।
Corriere della Sera नाम के अखबार ने रिपोर्ट छापी। उसमें कहा गया हादसा जानबूझकर किया गया कृत्य था। तकनीकी खराबी को खारिज बताया गया। यह दावा गंभीर था। लेकिन भारतीय जांच एजेंसी ने इसे अटकलबाजी कहा। जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना गलत है।
AAIB ने बताया जांच सख्ती से नियमों के अनुसार हो रही है। Aircraft Accident Investigation Rules 2025 लागू हैं। साथ ही ICAO Annex 13 के मानक अपनाए गए हैं। ये अंतरराष्ट्रीय नियम हैं। इनका मकसद दोष तय करना नहीं होता। मकसद कारण समझना और सुरक्षा सुधारना होता है।
एजेंसी ने साफ किया कि शुरुआती रिपोर्ट सीमित होती है। उसमें उस समय के तथ्य रखे जाते हैं। यह अंतिम निष्कर्ष नहीं होता। असली कारण अंतिम रिपोर्ट में बताया जाएगा। उसमें सुरक्षा सिफारिशें भी होंगी। इसलिए अभी इंतजार जरूरी है। जल्दबाजी से भ्रम फैलता है।
AAIB ने मीडिया से सावधानी की अपील की। कहा अपुष्ट खबरें डर फैलाती हैं। जांच भी प्रभावित हो सकती है। विमान हादसों में भावनाएं जुड़ी होती हैं। इसलिए खबरें सोच समझकर छापनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी यही सलाह देती हैं। अंतिम रिपोर्ट आने तक धैर्य जरूरी है।
विशेषज्ञ कहते हैं विमान जांच जटिल होती है। ब्लैक बॉक्स डेटा पढ़ा जाता है। तकनीकी सिस्टम की जांच होती है। मानव कारक भी देखे जाते हैं। मौसम की स्थिति भी जांची जाती है। हर एंगल से विश्लेषण होता है। इसलिए निष्कर्ष आने में समय लगता है।
सरकार और एजेंसी ने दोहराया है। अंतिम रिपोर्ट ही असली तस्वीर देगी। तब पता चलेगा असली कारण क्या था। तब तक अफवाहों से बचना चाहिए। हादसे गंभीर होते हैं। सच भी गंभीरता से सामने आना चाहिए। अभी जांच जारी है, फैसला नहीं।