UGC के खिलाफ याचिका पर फूटा CJI सूर्यकांत का गुस्सा, बोले - 'ये हद से ज्यादा हो रहा...'
आज CJI सूर्यकांत UGC के खिलाफ याचिका पर कई कड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने इस याचिका को मीडिया में चर्चा पैदा करने के लिए दाखिल करने की बात कही है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के नए नियमों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. बुधवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अब ये हद से ज्यादा हो रहा है. CJI ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस याचिका में पहले वाली याचिकाओं से क्या नया है.
याचिका को मीडिया पब्लिसिटी का बताया हथियार
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि ये याचिका सिर्फ मीडिया में चर्चा पैदा करने के लिए दाखिल की गई लगती है. उन्होंने पूछा, "यह जनहित याचिका क्यों? क्या इसमें कुछ अलग है जो दूसरी याचिकाओं में नहीं था? वरना यूट्यूब पर कैसे आएंगे."
CJI की यह टिप्पणी दिखाती है कि अदालत बार-बार एक ही मुद्दे पर याचिकाओं से परेशान है. वकील ने दलील दी कि नियम अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बनाए गए हैं, लेकिन CJI ने इसे मीडिया का लालच करार दिया.
जनवरी में नियमों पर लगी थी रोक
यह कोई नई बात नहीं है. जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026' पर रोक लगा दी थी. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा था कि ये नियम प्रथम दृष्टया अस्पष्ट हैं.
इनके बहुत व्यापक असर हो सकते हैं और समाज को खतरनाक तरीके से बांट सकते हैं. कोर्ट ने माना कि इनमें अस्पष्टताएं हैं और दुरुपयोग की आशंका साफ है.
नियमों में क्या है विवाद?
ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने और भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए थे, लेकिन विरोधियों का कहना है कि इनमें जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा सिर्फ SC, ST और OBC तक सीमित है. इससे सामान्य वर्ग के छात्रों को नुकसान हो सकता है.
कई जगहों पर छात्रों और संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए. याचिकाओं में दावा किया गया कि ये नियम असंवैधानिक हैं और समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं.
कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने पहले नियमों को रोककर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था. अब नई याचिका पर CJI की टिप्पणी से लगता है कि अदालत बार-बार एक ही मुद्दे को दोहराने वाली याचिकाओं पर सख्त रुख अपना रही है. कोर्ट चाहती है कि नियमों को सही तरीके से फिर से देखा जाए ताकि कोई पक्ष प्रभावित न हो.


