नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने सोमवार को अपनी महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2.0 को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि दिल्ली कैबिनेट द्वारा यह नई नीति उपराज्यपाल की अंतिम स्वीकृति के बाद 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगी. इस नीति के तहत सरकार नए इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर भारी वित्तीय छूट और रियायतें दे रही है. जिससे राजधानी में निजी और वाणिज्यिक परिवहन का ढांचा पूरी तरह बदलने की उम्मीद है.
30 लाख तक के वाहनों पर टैक्स और फीस माफ
नई ईवी नीति का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि 30 लाख रुपये तक की कीमत वाले किसी भी नए ई-वाहन की खरीद पर ग्राहकों को न तो रोड टैक्स देना होगा और न ही रजिस्ट्रेशन फीस लगेगी. वर्तमान में दिल्ली में गाड़ियों की एक्स-शोरूम कीमत के आधार पर 4% से लेकर 10% तक रोड टैक्स वसूला जाता है. इस नीति के लागू होने से 30 लाख रुपये की इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाले ग्राहकों को सीधे तौर पर करीब 3 लाख रुपये की बचत होगी. यदि कोई ग्राहक अपने पुराने बीएस-4 (BS-IV) या उससे कम श्रेणी के कमर्शियल वाहन को स्क्रैप कराकर नया ई-वाहन खरीदता है, तो उसे 1 लाख रुपये का स्क्रैपिंग इंसेंटिव और 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी. यानी कुल मिलाकर एक खरीदार को 5 लाख रुपये तक का सीधा फायदा मिल सकता है.
2027 से सिर्फ ई-ऑटो का पंजीकरण
शहर के कुल वाहन प्रदूषण में वाणिज्यिक वाहनों की हिस्सेदारी 33% है. जिसमें 3.5 टन तक की क्षमता वाले छोटे मालवाहक (N-1 श्रेणी) सबसे आगे हैं. इसके अलावा 46% प्रदूषण दोपहिया और तिपहिया वाहनों के कारण होता है. 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो (ई-ऑटो) और एन-1 श्रेणी के मालवाहक वाहनों का ही नया पंजीकरण किया जाएगा. 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली के भीतर पेट्रोल से चलने वाले नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण पूरी तरह बंद हो जाएगा और सिर्फ ई-दोपहिया (इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर) वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा.
प्रदूषण नियंत्रण में मिलेगी बड़ी मदद
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों के दौरान दिल्ली के हवा में मौजूद पीएम 2.5 (PM 2.5) स्तर में वाहनों के धुएं की हिस्सेदारी 46% से 53% तक पहुंच जाती है. सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रायचौधरी के मुताबिक, यदि दिल्ली के परिवहन को 100% इलेक्ट्रिक में बदल दिया जाए, तो शहर का वायु प्रदूषण घटकर आधा हो सकता है क्योंकि ई-वाहन पूरी तरह धुआं-मुक्त होते हैं.
बुनियादी ढांचे का विकास और रोजगार
नई नीति केवल रियायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए एक नया बाजार भी तैयार कर रही है. ई-वाहनों की बढ़ती संख्या को सुचारू रूप से चार्जिंग की सुविधा देने के लिए दिल्ली में 32 हजार नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे. इससे निजी कंपनियों के व्यापार में वृद्धि होगी और साथ ही बड़े पैमाने पर तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. हालांकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले से ईवी नीतियां लागू हैं. लेकिन दिल्ली की यह नई नीति देश में सबसे अधिक प्रोत्साहन देने वाली योजना बन गई है.
नई नीति के संभावित प्रभाव
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर साल लगभग 5 लाख पारंपरिक (पेट्रोल-डीजल-सीएनजी) वाहन और औसतन 70,000 इलेक्ट्रिक वाहन बिकते हैं. प्रशासन का अनुमान है कि 2030 तक सड़कों पर दौड़ने वाले लाखों वाहन इलेक्ट्रिक में तब्दील हो जाएंगे. इस नीति को लेकर कुछ व्यावहारिक चिंताएं भी सामने आई हैं. परिवहन विभाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर अनिल छिकारा का मानना है कि इतनी अधिक सब्सिडी के कारण जिन लोगों के पास पहले से गाड़ियां हैं. वे भी नया ई-वाहन खरीदने के लिए प्रेरित होंगे. इससे लोग सार्वजनिक परिवहन को छोड़कर निजी वाहनों की तरफ भागेंगे. जिससे दिल्ली की सड़कों पर वाहनों का बोझ बढ़ेगा और ट्रैफिक जाम की समस्या अधिक गंभीर हो सकती है.
डीबीटी के लिए नया पोर्टल तैयार
परिवहन आयुक्त निहारिका राय ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी व्यवस्था के लिए सभी प्रकार की प्रोत्साहन राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी. इसके लिए एक नया समर्पित ईवी पोर्टल तैयार किया जा चुका है. जिसे 1 जुलाई के बाद आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा. वाहन मालिकों को सब्सिडी का लाभ लेने के लिए इस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसके बाद अधिकतम 60 दिनों के भीतर राशि उनके खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी. First Updated : Tuesday, 30 June 2026