राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर साइबर ठगों ने NRI डॉक्टर कपल को 17 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट, लूट लिए 15 करोड़

दिल्ली में रहने वाले 77 वर्षीय बुजुर्ग एनआरआई डॉक्टर दंपति डॉ. ओम तनेजा और डॉ. इंदिरा तनेजा को साइबर ठगों ने 24 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक यानी 17 दिनों तक डिजिटल गिरफ्तारी में रखकर लगभग 15 करोड़ की ठगी कर ली.

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नई दिल्ली: दिल्ली में रहने वाले एक बुजुर्ग प्रवासी दंपति, डॉ. ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा, को साइबर ठगों ने बड़ी चालाकी से लगभग 15 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बना दिया. यह दंपति करीब 48 साल तक अमेरिका में रहा और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े काम कर चुका है. सेवानिवृत्ति के बाद 2015 में वे भारत लौट आए और तब से सामाजिक व धर्मार्थ कार्यों में सक्रिय थे.

धोखाधड़ी की शुरुआत 

यह पूरी घटना 24 दिसंबर 2025 को शुरू हुई. ठगों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसी के बड़े अधिकारी बताकर फोन किया. उन्होंने दंपति को बताया कि उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले दर्ज है. धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और पीएमएलए कानून का हवाला देकर गिरफ्तारी की धमकी दी गई. डर के मारे दंपति ने उनकी बात मान ली. 

17 दिनों तक लगातार वीडियो निगरानी

24 दिसंबर से 10 जनवरी की सुबह तक, यानी पूरे 17 दिनों तक, ठगों ने इस दंपति को "डिजिटल गिरफ्तारी" में रखा. वीडियो कॉल के जरिए उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती थी. खासकर 77 साल की डॉ. इंदिरा तनेजा को आठ अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया. कभी 2 करोड़, तो कभी 2.10 करोड़ या इससे ज्यादा रकम. कुल मिलाकर 14.85 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई.

बैंक में भी दी गई थी फर्जी स्क्रिप्ट

ठग इतने चालाक थे कि डॉ. इंदिरा को पहले से ही सिखाया गया था कि बैंक वाले अगर बड़ी रकम के बारे में सवाल करें तो क्या जवाब देना है. जब बैंक मैनेजर ने पूछताछ की, तो उन्होंने वही तैयार जवाब दोहरा दिए. ठग हर समय वीडियो कॉल पर बने रहते थे ताकि कोई शक न करे. बाहर जाने या किसी से बात करने पर भी तुरंत पति के फोन पर कॉल शुरू कर देते थे.

पुलिस स्टेशन जाकर खुली हकीकत

10 जनवरी को ठगों ने डॉ. इंदिरा को कहा कि अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) उनकी सारी रकम वापस कर देगा. इसके लिए उन्हें पुलिस स्टेशन जाना होगा. वे वीडियो कॉल पर रहते हुए ही थाने पहुंचीं और वहां अधिकारियों से बात भी करवाई. लेकिन ठगों ने पुलिस से बदतमीजी की, जिससे संदेह हुआ. असल में कोई रिफंड नहीं था, यह सब धोखा था. 

पुलिस ने शुरू की जांच

जीवन भर की कमाई गंवाने के बाद यह दंपति गहरे सदमे में है. दिल्ली पुलिस ने इस मामले को बहुत गंभीर मानते हुए स्पेशल सेल की साइबर क्राइम यूनिट और आईएफएसओ को जांच सौंपी है. ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए किसी भी कॉल पर पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत पुलिस से संपर्क करें.  First Updated : Sunday, 11 January 2026