पीएम मोदी के मणिपुर पहुंचने से पहले शांति बहाली की कोशिशें तेज, NH-2 हाइवे को फिर से खोलने पर सहमत हुए कुकी

मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में अहम पहल के तहत कुकी-जो परिषद ने NH-2 को आवश्यक वस्तुओं और यात्रियों के लिए खोलने पर सहमति दी है. पीएम मोदी के संभावित दौरे से पहले केंद्र सरकार ने कुकी संगठनों के साथ समझौते किए हैं, जिनमें शांति, हथियार नियंत्रण और शिविरों के पुनर्संयोजन जैसे अहम बिंदु शामिल हैं.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

Manipur news: नई दिल्ली से मणिपुर के लिए बड़ी खबर सामने आई है, जहां पीएम नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे से पहले शांति बहाली और हालात सामान्य करने के प्रयास तेज हो गए हैं. इस कड़ी में ‘कुकी-जो’ परिषद (Kuki-Zo Council - KZC) ने एक अहम फैसला लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) को आम नागरिकों और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही के लिए खोलने पर सहमति दे दी है.

पीएम मोदी के दौरे से पहले ‘गुडविल’ के संकेत

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के संभावित मणिपुर दौरे को ध्यान में रखते हुए यह फैसला एक 'गुडविल जेस्चर' के रूप में लिया गया है. केंद्र सरकार भी पूरी ताकत के साथ मणिपुर में स्थिरता बहाल करने की दिशा में सक्रिय है. यह निर्णय न केवल स्थानीय जनता के लिए राहत लेकर आएगा, बल्कि सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

गृह मंत्रालय और KZC की कई दौर की बैठकें

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, यह समझौता नई दिल्ली में मंत्रालय के अधिकारियों और KZC के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई लगातार बैठकों का नतीजा है. मंत्रालय ने कहा कि परिषद ने राजमार्ग पर शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने का भी वचन दिया है.

NH-2 मणिपुर की जीवनरेखा

राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) मणिपुर को नागालैंड और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला एक रणनीतिक रूप से बेहद अहम मार्ग है. मई 2023 में राज्य में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद यह राजमार्ग बाधित हो गया था, जिससे हजारों लोगों का विस्थापन और आवश्यक वस्तुओं की किल्लत हो गई थी.

क्या है सरकार की रणनीति?

सरकार की कोशिश है कि मोदी के दौरे से पहले मणिपुर में हालात शांत रहें, ताकि एक सकारात्मक संदेश देश और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भेजा जा सके. इसके साथ ही, शांति और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं.

केंद्र के साथ सहयोग का आश्वासन

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि केजेडसी ने NH-2 पर शांति बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा तैनात सुरक्षा बलों के साथ पूर्ण सहयोग का वादा किया है. इससे उम्मीद है कि अब राजमार्ग पर कोई बाधा नहीं उत्पन्न होगी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल की जा सकेगी.

शांति की ओर अगला कदम

NH-2 पर सहमति के अलावा, गृह मंत्रालय, मणिपुर सरकार, कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में एक त्रिपक्षीय बैठक भी हुई. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था. त्रिपक्षीय परिचालन निलंबन (एसओओ) समझौते की पुन: समीक्षा और उस पर नए आधारभूत नियमों के साथ हस्ताक्षर करना.

समझौते की मुख्य शर्तें

मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखा जाएगा. संवाद और शांतिपूर्ण प्रक्रिया के जरिए राज्य में स्थायी समाधान लाने की आवश्यकता है. यह समझौता एक वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा और यह राज्य में स्थिरता और शांति लाने की दिशा में एक और मजबूत कदम माना जा रहा है.

कैडरों और हथियारों पर भी हुआ समझौता

गृह मंत्रालय के अनुसार, केएनओ और यूपीएफ ने कई अहम प्रस्तावों पर सहमति जताई है. संघर्ष संभावित क्षेत्रों से सात निर्दिष्ट शिविरों को स्थानांतरित किया जाएगा. शिविरों की संख्या में कटौती की जाएगी. हथियारों को निकटतम CRPF और BSF शिविरों में जमा किया जाएगा. सुरक्षा बलों द्वारा कैडरों का कड़ा भौतिक सत्यापन किया जाएगा ताकि विदेशी नागरिकों को, यदि कोई हैं, सूची से हटाया जा सके.

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