अहमदाबार: करीब 18 साल पहले देश को दहला देने वाले 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने विशेष कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद को बरकरार रखा है. इसके साथ ही दोषियों द्वारा दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया. हाईकोर्ट ने धमाकों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है. इस फैसले को इस बहुचर्चित मामले में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है.
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के लिए गुजरात हाईकोर्ट में विशेष पीठ का गठन किया गया था. मार्च 2025 से इस मामले पर नियमित सुनवाई चल रही थी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने फांसी की सजा की पुष्टि की मांग की, जबकि दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अपनी अपीलें दाखिल की थीं. दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब हाईकोर्ट ने अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए विशेष अदालत के आदेश को पूरी तरह सही माना और सभी अपीलों को खारिज कर दिया.
इस मामले में अहमदाबाद की विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को फैसला सुनाया था. अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 38 को फांसी और 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. भारतीय कानून के अनुसार किसी भी निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं होती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे. इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह पूरा मामला गुजरात हाईकोर्ट के सामने विचाराधीन था, जहां अब सजा को मंजूरी मिल गई है.
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में कुछ ही मिनटों के भीतर शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई बम धमाके हुए थे. इन विस्फोटों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. धमाके भीड़भाड़ वाले बाजारों, बसों और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए थे, जिससे भारी जनहानि हुई. इन सिलसिलेवार धमाकों में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. जांच एजेंसियों ने इसे देश के सबसे गंभीर आतंकी हमलों में शामिल माना था. इसके बाद कई वर्षों तक जांच चली और बड़ी संख्या में सबूत जुटाए गए, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया.
विशेष अदालत के फैसले के बाद सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी. दूसरी ओर, राज्य सरकार ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने सभी कानूनी पहलुओं और सबूतों की गहन समीक्षा करने के बाद निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने का निर्णय लिया. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि धमाकों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. इस आदेश को पीड़ित परिवारों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है.
गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के बाद 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा पर न्यायिक मुहर लग गई है. हालांकि, भारतीय कानून के तहत दोषियों के पास अभी भी देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार मौजूद है. First Updated : Tuesday, 07 July 2026