सेक्स के बाद कुंडली नहीं मिली कहकर मुकरना पड़ सकता है भारी, दिल्ली हाई कोर्ट सख्त

शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाना और बाद में कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है. दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसा व्यवहार आरोपी की मंशा पर सवाल खड़ा करता है और प्रथम दृष्टया यह धोखे से सहमति हासिल करने का मामला हो सकता है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में कुंडली नहीं मिलने का हवाला देकर विवाह से इनकार करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि ऐसा आचरण आरोपी की मंशा और उसके द्वारा किए गए वादों की वास्तविकता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

रेप के एक मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यदि सहमति झूठे आश्वासन के आधार पर प्राप्त की गई हो, तो यह कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है.

क्या कहा कोर्ट ने

मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा कर रही थीं. अदालत के सामने पेश सामग्री के आधार पर कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने महिला को भरोसा दिलाया था कि कुंडली मिल चुकी है और शादी में कोई बाधा नहीं है. एक संदेश में आरोपी ने कथित तौर पर कहा था कि "कल ही शादी कर रहे हैं हम."

बेंच ने कहा कि शुरुआत में शादी का भरोसा देने के बाद, 'कुंडली न मिलने' का आधार बनाकर शादी से इनकार करना, पहली नजर में आवेदक द्वारा किए गए वादे की असलियत और उसकी मंशा पर सवाल उठाता है. इस स्तर पर ऐसा व्यवहार BNS की धारा 69 के तहत अपराध की श्रेणी में आएगा, जो विशेष रूप से उन मामलों से संबंधित है जहाँ धोखे या शादी के झूठे आश्वासन के माध्यम से यौन संबंध बनाए जाते हैं.

क्या है पूरा मामला

शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि वह लंबे समय तक आरोपी के साथ संबंध में रही. महिला के अनुसार, आरोपी ने शादी का वादा कर कई बार शारीरिक संबंध बनाए.

महिला ने यह भी दावा किया कि आरोपी और उसके परिवार की ओर से शादी का आश्वासन मिलने के बाद उसने पहले अपनी शिकायत वापस ले ली थी. हालांकि, बाद में आरोपी ने कुंडली नहीं मिलने का हवाला देकर शादी से इनकार कर दिया.

कोर्ट ने उठाए अहम सवाल

जस्टिस शर्मा ने कहा कि आरोपी का वर्तमान रुख उसके पहले किए गए दावों से मेल नहीं खाता. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि कुंडली मिलना इतना महत्वपूर्ण और निर्णायक था, तो शारीरिक संबंध बनाने से पहले ही इस मुद्दे को स्पष्ट कर लेना चाहिए था.

कोर्ट ने कहा कि पहले कुंडली के आधार पर मामला सुलझाने का भरोसा दिया गया और बाद में उसी को कारण बताकर इनकार किया गया. इससे यह संकेत मिलता है कि संभव है सहमति झूठे वादे के आधार पर प्राप्त की गई हो.

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