नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी माहौल गरमाने लगा है. मुर्शिदाबाद जिले में 'बाबरी मस्जिद' के नाम से एक नई मस्जिद बनाने का विवाद अब धार्मिक ध्रुवीकरण की नई आग बन गया है. टीएमसी से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने दिसंबर 2025 में इसकी नींव रखी थी और अब 11 फरवरी 2026 से निर्माण शुरू करने का ऐलान किया है.
हुमायूं कबीर, जो पहले टीएमसी में थे लेकिन अब अपनी जनता उन्नयन पार्टी बना चुके हैं, मुर्शिदाबाद के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी अलग सियासी जमीन तलाश रहे हैं.
उन्होंने बाबरी नाम का इस्तेमाल कर मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने की कोशिश की. बंगाल में करीब 30% मुस्लिम मतदाता हैं, जो ममता बनर्जी की टीएमसी का मजबूत आधार रहे हैं. हुमायूं का मकसद इन्हीं वोटों को बांटना है, जिससे टीएमसी को बड़ा नुकसान हो सकता है.
इस मुद्दे पर हिंदू संगठन, खासकर विश्व हिंदू रक्षा परिषद, सक्रिय हो गए हैं. लखनऊ में जगह-जगह पोस्टर लगे, जिनमें लिखा है, "हुमायूं हम आएंगे", "बाबरी फिर से गिराएंगे", "बंटोगे तो कटोगे". संगठनों ने 10 फरवरी को मुर्शिदाबाद पहुंचने का ऐलान किया.
इन पोस्टरों में ममता बनर्जी की तस्वीर भी लगाई गई, जिससे उन्हें भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. हिंदू संगठन किसी भी कीमत पर मस्जिद नहीं बनने देना चाहते.
बंगाल में पिछले चुनावों में मुस्लिम वोट ज्यादातर टीएमसी को मिले, जबकि हिंदू वोटों का बड़ा हिस्सा बीजेपी की ओर गया. अब यह विवाद दोनों तरफ ध्रुवीकरण बढ़ा रहा है. हुमायूं से मुस्लिम वोट बंट सकते हैं, तो हिंदू संगठनों के कूच से हिंदू वोट और मजबूत होकर बीजेपी की झोली में जा सकते हैं. ममता के लिए हिंदू-मुस्लिम बैलेंस बनाना मुश्किल हो जाएगा.
मुर्शिदाबाद अब बंगाल की सियासत की नई प्रयोगशाला बनता दिख रहा है. बाबरी का पुराना जख्म फिर से हरा हो गया है. अगर टकराव बढ़ा तो कानून-व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो सकती है. ममता बनर्जी को अब सावधानी से कदम उठाने होंगे, वरना उनका मजबूत किला कमजोर पड़ सकता है. First Updated : Tuesday, 10 February 2026