नई दिल्ली : गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों को कड़ी नसीहत दी. उन्होंने शायरी के जरिए भी तंज कसे और कहा कि आईना देखकर अपनी सच्चाई छिपाना मुश्किल होगा. पीएम ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और आम आदमी पार्टी समेत पूरे विपक्ष को निशाने पर लिया. घुसपैठियों को बचाने, बैंकिंग घोटालों और जेब भरने की राजनीति पर जमकर हमला बोला. उनका भाषण सत्ता और विपक्ष के बीच गहरे मतभेद को उजागर करता है.
PM मोदी का शायराना अंदाज में तंज
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर करारा प्रहार करते हुए शायरी का सहारा लिया. उन्होंने कहा, तुम दुनिया को कितना धोखा दोगे, आईना देख लिया तो अपनी सच्चाई कहां छिपाओगे. यह पंक्ति सुनकर सदन में सन्नाटा छा गया. पीएम ने साफ कहा कि विपक्षी दल अब उपदेश देने की स्थिति में नहीं हैं. उनकी पुरानी गलतियां आज भी सामने आ रही हैं.
टीएमसी पर गहरा हमला
पीएम मोदी ने तृणमूल कांग्रेस को खास निशाना बनाया. उन्होंने बंगाल सरकार को निर्मम बताया और कहा कि पतन के हर पैमाने पर नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. वहां घुसपैठियों को बचाने के लिए अदालतों पर दबाव डाला जा रहा है. आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है, बेटियों की सुरक्षा खतरे में है. फिर भी वे संसद में उपदेश देते हैं. पीएम ने पूछा, नौजवान ऐसे लोगों को कैसे माफ करेंगे.
आम आदमी पार्टी पर ब्लैक का ताना
बिना नाम लिए आम आदमी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए पीएम ने कहा कि एक दल की पूरी सरकार शराब में डूबी हुई है. उन्हें ब्लैक शब्द बहुत पसंद है. पता नहीं ब्लैक से उनका पुराना क्या रिश्ता है. उन्होंने विपक्षी दलों की पुरानी आदतों पर चोट की और कहा कि हर दल का अपना भूतकाल होता है. डील और घोटालों की चर्चा उनकी पहचान बन चुकी है.
विपक्षी दलों ने सिर्फ जेब भरने पर ध्यान दिया
पीएम ने कहा कि दशकों तक केंद्र और राज्यों में सत्ता संभालने के बावजूद विपक्षी दलों ने सिर्फ जेब भरने पर ध्यान दिया. बोफोर्स जैसी डील याद आती हैं. लोगों के जीवन में बदलाव उनकी प्राथमिकता कभी नहीं रही. कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और वाम दल सभी पर एक साथ वार करते हुए उन्होंने कहा कि विकास उनकी सोच से परे था.
बैंकिंग क्षेत्र की तबाही का जिक्र
पीएम मोदी ने यूपीए काल में बैंकिंग व्यवस्था को तबाही के कगार पर बताया. उस समय फोन बैंकिंग चलती थी. नेताओं के फोन पर करोड़ों रुपये लुटाए जाते थे. गरीबों को बैंक से दुत्कारा जाता था. नेता अरबों रुपये अपने लोगों को दे देते थे और वे पैसे हजम कर जाते. 2014 से पहले अर्थव्यवस्था की रीढ़ ही कमजोर हो चुकी थी. अब सुधार हो रहे हैं.
First Updated : Thursday, 05 February 2026