इनकम टैक्स विभाग ने ओडिशा में अवैध खनन से अर्जित 200 करोड़ रुपये की काली कमाई से खरीदी गई संपत्तियों को जब्त किया है. विभाग ने भुवनेश्वर में 10 हाई-वैल्यू अपार्टमेंट और कटक जिले के अथागढ़ में 11.2 एकड़ जमीन को अस्थायी रूप से अटैच किया है. ये संपत्तियां दिल्ली निवासी ओडिशा के कारोबारी तपस रंजन पांडा के बेनामी खातों के जरिए खरीदी गई थीं.
इस घोटाले का खुलासा आईटी विभाग की जांच में हुआ, जिसमें यह सामने आया कि तपस रंजन पांडा ने जाजपुर जिले के धर्मशाला तहसील में डंकारी पहाड़ी पर अवैध तरीके से पत्थरों का खनन किया. राज्य सरकार ने 2014 के बाद इस क्षेत्र में खनन की अनुमति नहीं दी थी, फिर भी पांडा ने इन पत्थरों को 200 करोड़ रुपये में बेच दिया.
आईटी अधिकारियों के मुताबिक, पांडा ने अपनी अवैध कमाई को छिपाने के लिए दो बेनामी कंपनियों के नाम पर जमीन और फ्लैट खरीदीं. इन कंपनियों का नियंत्रण पांडा के रिश्तेदारों और कर्मचारियों के पास था, जबकि असली मालिक वही था. इसके बाद उसने भुवनेश्वर, गुरुग्राम और गाजियाबाद में फ्लैट्स और कटक तथा भद्रक में जमीन खरीदी. फिर इन संपत्तियों को पेचीदा लेनदेन के जरिए अपनी और अपनी पत्नी के नाम पर ट्रांसफर कर लिया.
पांडा ने अपनी अवैध आय को वैध दिखाने के लिए फर्जी इनकम टैक्स और जीएसटी रिटर्न दाखिल किए और फर्जी बिलिंग के जरिए इन संपत्तियों को सफेद धन में बदलने की कोशिश की. इनकम टैक्स विभाग ने बेनामी ट्रांजैक्शंस (प्रोहिबिशन) अमेंडमेंट एक्ट, 2016 के तहत इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से 90 दिनों के लिए जब्त कर लिया है. अगर जांच में ये संपत्तियां पूरी तरह बेनामी साबित होती हैं, तो इन्हें सरकारी संपत्ति में बदल दिया जाएगा. इस कानून के तहत दोषियों को 1 से 7 साल तक की सजा और संपत्ति के बाजार मूल्य का 25% तक जुर्माना हो सकता है.
ओडिशा देश का सबसे बड़ा खनिज उत्पादक राज्य है, लेकिन यहां अवैध खनन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. हाल ही में राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया, जिसमें 360 लोग गिरफ्तार हुए और 524 वाहन जब्त किए गए. इस अभियान के तहत कई खनन माफियाओं पर शिकंजा कसा गया और अवैध खनन के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ. First Updated : Tuesday, 01 April 2025