नई दिल्ली: भारत सरकार और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से अटकी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. दशकों से लंबित इस समझौते को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को इसका आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है.
इस बहुप्रतीक्षित समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ माना जा रहा है. इसके तहत भारत ने यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कारों पर लगने वाले 110 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 40 प्रतिशत करने का फैसला किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में इस शुल्क को और कम कर 10 प्रतिशत तक लाया जा सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 15,000 यूरो (करीब 13.5 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाली कारों पर तत्काल टैक्स कटौती के लिए सहमति जता दी है.
इस फैसले से वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसे प्रमुख यूरोपीय वाहन निर्माताओं के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश और कारोबार करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.
घरेलू उद्योग को संरक्षण देने के उद्देश्य से सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को शुरुआती पांच वर्षों तक इस टैरिफ कटौती से बाहर रखने का फैसला किया है.
गौरतलब है कि भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन इसके बावजूद यहां आयात शुल्क वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक माने जाते रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, सरकार 27 देशों वाले यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कुछ चुनिंदा कारों पर तत्काल ड्यूटी कटौती के लिए तैयार हो गई है. यह राहत उन वाहनों को मिलेगी जिनकी इम्पोर्ट कीमत करीब USD 17,739 से अधिक है.
इस कदम से फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जो लंबे समय से इम्पोर्ट बाधाओं को कम करने के लिए दबाव बना रही थीं.
फिलहाल भारत पूरी तरह से बनी कारों पर दुनिया में सबसे अधिक इम्पोर्ट ड्यूटी लगाता है. यह नीति घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को बचाने और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अपनाई गई थी.
ऐसे में टैरिफ में किसी भी बड़ी कटौती का असर ऑटोमोबाइल सेक्टर, भारत–EU ट्रेड रिलेशंस और भविष्य में होने वाले निवेश प्रवाह पर दूरगामी रूप से पड़ने की संभावना है.
First Updated : Monday, 26 January 2026