पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भारत की नजर, जयशंकर ने बताया सरकार कैसे संभाल रही स्थिति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकते हैं. सरकार भारतीय उपभोक्ताओं के हित, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. इसी मुद्दे पर सोमवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में विस्तृत बयान दिया. उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हित और देश की ऊर्जा सुरक्षा है. साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है.
राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में उस क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है. इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है. जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और यह आकलन कर रही है कि इन घटनाओं का भारतीय अर्थव्यवस्था और आपूर्ति तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.
संयम और कूटनीति पर जोर
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत ने 20 फरवरी को ही एक आधिकारिक बयान जारी कर पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहरी चिंता जताई थी. उस बयान में सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की गई थी. उन्होंने दोहराया कि भारत का मानना है कि किसी भी संघर्ष का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है. इसलिए भारत लगातार सभी पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील करता रहेगा.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पश्चिम एशिया
जयशंकर ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया का स्थिर और शांतिपूर्ण रहना भारत के लिए बेहद जरूरी है. यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा केंद्र है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक इसी क्षेत्र पर निर्भर है. उन्होंने कहा कि यदि इस इलाके में अस्थिरता बढ़ती है तो इसका असर तेल की कीमतों, व्यापारिक मार्गों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. इसलिए भारत अपने सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है और हालात पर करीब से नजर रख रहा है.
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
विदेश मंत्री ने संसद को यह भी बताया कि सरकार केवल आर्थिक पहलुओं पर ही नहीं बल्कि पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रही है. उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और वहां रहते हैं. बढ़ते तनाव के बीच अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से अपने देश लौट चुके हैं. सरकार लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी सहायता उपलब्ध कराएगी.
ईरान के जहाज को दी गई अनुमति
अपने बयान में जयशंकर ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत को धन्यवाद दिया है क्योंकि भारत ने ईरानी युद्धपोत “लावन” को कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डालने की अनुमति दी थी. मंत्री के अनुसार, ईरान ने 28 फरवरी को भारत से अनुरोध किया था कि उसके तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति दी जाए. इसके बाद 1 मार्च को अनुमति दे दी गई और यह युद्धपोत 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंच गया. जयशंकर ने कहा कि यह निर्णय मानवीय और कूटनीतिक दृष्टि से सही कदम था.
सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट
अपने बयान के अंत में विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा स्थिति में भारत के राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर हैं. इसमें ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और भारतीय उपभोक्ताओं का हित प्रमुख हैं. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता रहेगा और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए लगातार संवाद की अपील करता रहेगा.


