दिल्ली HC ने शराब घोटाला- केजरीवाल वाले केस में CBI को दी बड़ी राहत, ट्रायल कोर्ट को ED केस में फैसला सुनाने से रोका

दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में सीबीआई ने अपील दायर की है. ट्रायल कोर्ट द्वारा अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 21 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. सुनवाई शुरू हो चुकी है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति घोटाले से जुड़े मामले में सीबीआई को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है. कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई अधिकारी की जांच में खामियों के लिए जांच कराने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है. साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक कोर्ट इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक ट्रायल कोर्ट ईडी से संबंधित केस में कोई निर्णय नहीं सुनाएगा. 

आज जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की पीठ ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई की, जिसमें अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की है.

CBI की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली शराब नीति केस में सीबीआई की उस अपील पर सुनवाई की, जिसमें ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश को चुनौती दी गई है. सीबीआई ने दलील दी कि निचली अदालत ने गंभीर आरोपों को नजरअंदाज किया है और जांच में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. कोर्ट ने आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए मामले की गहराई से जांच का रास्ता साफ किया है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें

सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में मजबूत दलीलें पेश कीं. उन्होंने कहा कि यह करप्शन का साफ मामला है. रिश्वत ली गई और मीटिंग हुईं इसके फोरेंसिक सबूत हैं.
उन्होंने आगे कहा- मैंने किसी एजेंसी को इतने बारीकी से सबूत इकट्ठा करते नहीं देखा. मैं कोई बढ़ा-चढ़ाकर बयान नहीं दे रहा हूं. मैं इसे सही साबित करना चाहता हूं.

ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक और जांच

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच अधिकारी की जांच कराने के आदेश पर तत्काल रोक लगा दी है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक हाईकोर्ट इस अपील पर अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक ट्रायल कोर्ट ईडी से जुड़े समानांतर केस में कोई फैसला नहीं सुना सकता. यह फैसला सीबीआई के लिए राहत भरा है और मामले की आगे की सुनवाई में निर्णायक साबित हो सकता है.

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