रूस से तेल खरीदने को लेकर ट्रंप की छूट पर भारत का करारा जवाब, कहा- 'इजाजत की जरूरत नहीं'
केंद्र सरकार ने शनिवार को स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेता है और जहां सस्ता व बेहतर विकल्प मिलेगा, वहीं से कच्चा तेल खरीदेगा.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है. ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और संवेदनशील हो गई है. ऐसे माहौल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है.
भारत ने दिया जवाब
इसी बीच खबर सामने आई कि अमेरिका ने भारत से रूस से तेल खरीदने को लेकर अपनी राय व्यक्त की है, जिसके बाद राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई. हालांकि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने शनिवार को स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेता है और जहां सस्ता व बेहतर विकल्प मिलेगा, वहीं से कच्चा तेल खरीदेगा.
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों का विस्तार किया है. पहले जहां देश लगभग 27 देशों से तेल आयात करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 40 देशों तक पहुंच गई है. इससे आपूर्ति के कई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो गए हैं और किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है.
सरकार ने यह भी पुष्टि की कि भारत अमेरिकी अस्थायी छूट मिलने के बाद रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा. यह छूट मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण दी गई थी. केंद्र ने साफ किया कि भारत अपने ऊर्जा हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेता है और तेल आयात के लिए किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भर नहीं है.
रूस से तेल खरीद पर भारत ने क्या कहा?
सरकार के अनुसार, भारत पहले भी रूस से तेल खरीदता रहा है और फरवरी 2026 में भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत ने अमेरिका और यूरोपीय देशों की आपत्तियों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखा था. 2022 के बाद रूस द्वारा दी गई रियायती कीमतों और भारतीय रिफाइनरियों की मांग के कारण इस आयात में काफी वृद्धि देखी गई.
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार ने यह भी बताया कि देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है. भारत के पास लगभग 250 मिलियन बैरल से अधिक का रिजर्व है, जो करीब सात से आठ सप्ताह की खपत के बराबर है. इसके अलावा भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता लगभग 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जो देश की मौजूदा घरेलू जरूरतों से अधिक है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई व खाड़ी क्षेत्र में तेहरान की जवाबी गतिविधियों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर असर पड़ा है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और कई देशों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं.


