US India oil Tariff : 6 अगस्त 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया. यह कदम भारत द्वारा रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद के विरोध में उठाया गया. भारत अभी भी प्रतिदिन 1.7 से 2.0 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद रहा है.
अमेरिका ने कहा था रूस से तेल खरीदने के लिए
भारत ने इस निर्णय को “अनुचित” बताया और स्पष्ट किया कि वह रूस से तेल इसलिए खरीद रहा है क्योंकि यूरोपीय देशों ने रूस से आपूर्ति बंद कर दी थी. भारत ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका ने पहले खुद कहा था कि भारत को वैश्विक ऊर्जा संतुलन बनाए रखने के लिए रूसी तेल खरीदना चाहिए.
रूस है भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
रूस, जो 2022 से पहले भारत की तेल जरूरतों का सिर्फ 2% ही पूरा करता था, अब 35-40% तेल आपूर्ति कर रहा है. भारी डिस्काउंट की वजह से भारत ने इसका भरपूर लाभ उठाया, जिससे रिफाइनरियों के मुनाफे में इज़ाफा हुआ.
पहले की तुलना में छूट घटी
हालांकि अब रूसी छूट घट गई है पहले जहां 12 डॉलर प्रति बैरल की छूट थी, वह अब सिर्फ 2.2 डॉलर रह गई है. इससे भारत के लिए रूसी तेल कम लाभदायक हो गया है. अगर भारत को अब रूस के बजाय पश्चिम एशिया, अमेरिका या अफ्रीका से तेल लेना पड़ा, तो उसे हर साल 25 से 40 हजार करोड़ रुपये अधिक खर्च करने पड़ सकते हैं.
कच्चे तेल की कीमतों पर संभावित असर
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर भारत अचानक रूस से तेल लेना बंद कर देता है, तो इससे वैश्विक तेल कीमतें भी बढ़ सकती हैं. इससे देश में पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, महंगाई बढ़ेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा.
चीन का प्रभाव सीमित, रूस पर भी असर संभव
भारत के हटने से चीन उतना अतिरिक्त तेल नहीं खरीद सकेगा, जिससे रूस को भी आर्थिक झटका लग सकता है. ऐसे में रूस के पास छूट फिर से बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.
भारत की रणनीति, संतुलन बनाए रखना जरूरी
भारत का रुख स्पष्ट है सस्ता और भरोसेमंद तेल जहां से मिलेगा, वहीं से खरीदा जाएगा, जब तक उस पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध न हो. रूस के तेल पर फिलहाल सिर्फ ‘प्राइस कैप’ है, कोई सीधा प्रतिबंध नहीं. इसलिए भारत रूस से तेल खरीद जारी रख सकता है, ताकि घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित किया जा सके और आम आदमी को राहत मिले.
First Updated : Sunday, 17 August 2025